जानकारी के अभाव में उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे गैस एजेंसी संचालक

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बैरिया/बलिया : जानकारी के अभाव में रसोई गैस के उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं गैस एजेंसी के संचालक क्योंकि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के गाइडलाइन के अनुसार नहीं संचालित रहे हैं गैस एजेंसी के संचालक। विभागीय अधिकारियों पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लोग लगा रहे हैं ।

नगर हो या देहात हर जगह गैस सिलेंडर के होम डिलेवरी देने पर ठेला चालक या वाहन चालक पर्ची के पैसे के ऊपर से उपभोक्ताओं से किराया के रूप में 30 रुपये से 50 रुपये तक प्रति सिलेंडर वसूलते हैं जबकि पर्ची के जमा पैसे में ट्रास्पोर्टेशन चार्ज जुड़ा रहता है। यही नहीं डिलेवरी देने के बाद गैस एजेंसी संचालक द्वारा प्रति सिलेंडर 20 से 30 रुपये उपभोक्ताओं को वापस भी किया जाना है, वह क्षेत्र में कहीं नहीं होता है। अधिकांश गैस एजेंसी संचालकों द्वारा हर महीने लाखों रुपये के वारे न्यारे किए जाते हैं। डिलेवरीमैन तौल मशीन भी नही लेकर सिलेंडर की डिलिवरी करते है।

चौकाने वाली बात यह है कि समय-समय पर संबंधित विभाग के अधिकारियों के यहां इसकी शिकायत उपभोक्ता करते रहे हैं किंतु हर बार अधिकारी कार्रवाई के बदले शिकायतकर्ता के साथ सुलह समझौता करा देते हैं। शिकायतकर्ता का हर शर्त उस समय गैस एजेंसी संचालक द्वारा मानने की मंजूरी होती है, भले उस पर बाद में अमल न हो। यह बात जरूर है कि अधिकांश गैस एजेंसियों पर घटतौली का धंधा नहीं होता किंतु कुछ एजेंसी संचालक घटतौली भी करते हैं।

इस संदर्भ में जब बैरिया के उपजिलाधिकारी लाल बाबू दुबे से पूछा कि गैस एजेंसी के संचालकों के मनमानी पर कब रोक लगेगी, तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कहीं भी किसी भी एजेंसी संचालक से अगर उपभोक्ता को दिक्कत है तो वह मेरे यहां लिखित शिकायत करें, त्वरित कार्रवाई की जाएगी। बिना लिखित शिकायत के मेरे स्तर से कार्रवाई संभव नहीं है।

रिपोर्ट – धीरज सिंह

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