गांवों को निगलने के लिए बेताब घाघरा, पानी के कहर से निपटने के लिए एनडीआरएफ तैनात

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बहराइच (ब्यूरो) हिमालय की तलहटी में बहने वाली घाघरा, सरयू और राप्ती जैसी कई सहायक नदियां पहाड़ों और तराई के जिलों में लगातार हो रही बारिश के चलते अपने उफान पर बह रही हैं। तराई के जिलों में बहने वाली ये नदियां हर वर्ष अपने साथ बाढ़ का कहर ले कर आती हैं, जिस बाढ़ के सैलाब से लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। हजारों लोगों के आशियाने पानी की धारा में विलीन हो जाते हैं। इस विभीषिका की धारा फसलों और ज़मीन को ही नहीं लोगों की जि़न्दगियाँ तक अपने आगोस में बहा ले जाती हैं। घाघरा नदी में एक बार फिर जलस्तर बढऩे से जिले की तीन 4 तहसीलों में बाढ़ का खतरा बुरी तरह मंडराने लगा है।

लगातार हो रही बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है, जिससे नदी के किनारे बसे गाँवों के लोगों में दहशत का तापमान भी बड़ी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। बीते 24 घंटों में घाघरा नदी के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की तेज़ी से बढ़ोत्तरी हो रही है। घाघरा नदी का जलस्तर जिस तेज़ी के साथ खतरे के निशान की तरफ बहराइच जिले में बढ़ रहा है, उसकी रफ़्तार ने यहाँ के ग्रामीणों के साथ-साथ प्रशासन की भी नींदें को उड़ा कर रख दी हैं ।

आपको बता दें कि अगर जलस्तर बढऩे की रफ़्तार यही रही तो अगले 8 से 10 घंटों में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को कभी भी पार कर सकता है। वहीं जलस्तर बढऩे के कारण घाघरा में कटान भी शुरू हो गयी है। अभी तक इस इलाके की सीमा में लगभग 55 बीघा खेती योग्य ज़मीन पानी की धारा में विलीन हो चुकी है। हालांकि प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए खुद को अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार बता रहा है।

एडीएम बोले एनडीआरएफ की टीम कैंप कर रही है
एडीएम संतोष कुमार रॉय ने बताया कि नदी में जलस्तर कल से आज तक 30 सेंटीमीटर तक बढ़ा है, फिलहाल पानी की स्थित अभी स्थिर बनी हुयी है, जिससे कुछ राहत जरूर मिली है। उन्होंने बताया कि हमने बाढ़ से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बाढ़ से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीम बाढ़ ग्रस्त महसी क्षेत्र में बाकायदा कैंप भी कर रही है, साथ ही फ्लड पीएसी यूनिट के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा जनपद के कलेक्ट्रेट आफिस में बने आपदा नियंत्रण कक्ष में एक अलग कण्ट्रोल रूम की भी स्थापना की गयी है, जहाँ 24 घंटे अराउंड द क्लॉक लोग तैनात कर दिए गए, जिससे कहीं भी अगर बाढ़ से सम्बंधित कोई सूचना आती है तो तत्काल उस पर एक्शन लिया जा सके।

रिपोर्ट – राकेश मौर्या

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