घट रहा है जिले की नदियों का स्तर, लोग ले रहे है राहत की सांस

बलिया (ब्यूरो)- जनपद में नदियों के चाल में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से लोगों में उहापोह की स्थिति बनी है। अभी दो दिन पूर्व तक गंगा व घाघरा दोनों ही बढ़ाव पर थी। ऐसे में नदियों के जलस्तर में घटाव-बढ़ाव की स्थिति से तटवर्ती लोग भी काफी हद तक हैरान हैं। उप्र. समेत अन्य राज्यों में बारिश की वजह से बाढ़ की जो विभीषिका मची है उसमें यहां जलस्तर में घटाव लोगों को समझ नहीं आ रहा है। हालांकि क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि अभी गंगा व घाघरा और भी रौद्र रूप में आएंगी। दूसरी ओर सप्ताह भर से मौसम के खुलने के बाद भी कटानरोधी कार्यों में तेजी नहीं आने से लोगों में काफी आक्रोश की स्थिति बनी है।

गंगा का जलस्तर घटाव पर, लोगों में राहत-
गंगा के जलस्तर में मंगलवार को घटाव दर्ज किया गया। गायघाट केंद्र पर सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 53.670 मीटर दर्ज किया गया। गंगा प्रति घंटा एक सेमी की रफ्तार से घटाव पर है। गंगा में घटाव से तटवर्ती लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं दूसरी तरफ अवशेष गंगापुर के सोनार टोला, बनिया टोला, चौबेछपारा के लोग कटान के डर से अपना आशियाना उजाड़ने में लगे रहे।

दुबेछपरा कटान निरोधक स्थल पर मंगलवार को बचाव कार्य मे तेजी के बजाय गति धीमी ही रही। पीचग का कार्य आनन-फानन में पूर्ण करने का प्रयास जारी रहा। वहीं 12 सौ मीटर लंबे बने रिंग बांध के पास पीचिंग का कार्य भी प्रभावित रहा। क्षतिग्रस्त बांध के मरम्मत का कार्य भी गतिशील नहीं हो सका।

हालांकि विभागीय अधिकारी ठेकेदार समय से कार्य पूर्ण करने का दंभ भरते रहे लेकिन ग्रामीणों ने निर्धारित समय में कार्य पूर्ण होने पर संशय व्यक्त किया। अवर अभियंता मुन्ना यादव ने बताया कि केहरपुर, सुघरछपरा को बचाने हेतु 200 मीटर स्पाइ¨लग कर बोरी डालने का कार्य प्रांरभ किया गया है।


घाघरा के तेवर हुए नरम-

घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे बढ़ोत्तरी से सांसत में अटकी तटीय लोगों की सांसे मंगलवार की दोपहर 11 बजे के बाद से नदी के जलस्तर में कमी के साथ ही सामान्य होने लगी। सोमवार की शाम के बाद से ही नदी के जलस्तर में ठहराव के साथ ही लोग राहत महसूस करने लगे। मंगलवार को नदी का तुर्तीपार हेड पर दोपहर 11 बजे 63.420 मी. तक पहुंच गया है। वहीं नदी में लगातार एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से कमी दर्ज की की गई है।


ग्रामीणों ने रोका कटानरोधी कार्य, आश्वासन पर फिर शुरू-

दुबेछपरा में शासन स्तर से 29 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे कटानरोधी कार्य को ग्रामीणों ने मंगलवार को तीन घंटे के लिए रोक दिया। सूचना पर पहुंचे बाढ़ विभाग के एसडीओ चंद्रमोहन शाही, सहायक अभियंता मुना यादव, जेई प्रशांत कुमार ने सुघरछपरा व केहरपुर के दर्जनों ग्रामीणों को काफी समझाया बुझाया तब जाकर काम चालू हुआ। दुबेछपरा में कटानरोधी कार्य ग्रामसभा केहरपुर की तरफ जेसीबी से कराया जा रहा था।

ग्रामीणों का कहना था कि बाढ़ विभाग जब केवल गोपालपुर और दुबेछपरा को बचाने के लिए कार्य कर रहा तो उधर ही करे केहरपुर में कोई भी कार्य नहीं करने दिया जाएगा। जब तक गंगा के मुहाने केहरपुर में कटान निरोधक कार्य प्रारंभ नहीं हो जाता तब तक इस क्षेत्र में काम नहीं करने दिया जाएगा। केहरपुर में खड़े अरार की स्लो¨पग का कार्य जेसीबी से प्रारंभ हुआ तब जाकर ग्रामीण माने। गौरतलब है कि सुघरछपरा ढाले पर 24 अप्रैल को केहरपुर के ग्रामीण गांव को बचाने के लिए कटानरोधी कार्य की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। इसमें दो दिनों तक चले अनशन के बाद जिलाधिकारी ने प्रोजेक्ट प्लान एसडीएम के माध्यम से अनशनरत लोगों को दिखा 15 जुलाई से काम शुरू कराने के आश्वाशन दिए थे।ऐसे में 17 जुलाई तक काम शुरू न होने पर ग्रामीणों ने कटान कार्य रोक दिया था। मौके पर पवन ओझा, जयप्रकाश ओझा, बाबा ओझा, अश्वनी ओझा, अक्षय गुप्त, मिलन अंसारी आदि मौजूद थे।

क्षेत्र में घाघरा नदी का पानी निरंतर घटता जा रहा है। इसी के साथ विभिन्न दियारों में कटान का वेग भी धीमा हो गया है। ऐसे में क्षेत्र के डूहां स्थित बनखंडी नाथ मठ की उत्तरी दीवाल पर चढ़ा घाघरा नदी का पानी नीचे खिसकते जाने से वहां के साधु संतों ने राहत की सांस ली है। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर जहां करीब दस सेमी कम हुआ है तो वहीं मात्र 20 डिस्मिल भूमि ही कटान की भेंट चढ़ी है। नदी का पानी कम होते जाने से दियारा सीसोटार व लीलकर में कटान पूरी तरह थम गया है। जबकि दियारा खरीद में धीमी गति से कटान अभी भी बदस्तूर जारी है।

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