गोरखपुर एटीएस यूनिट सिर्फ दो सिपाहियों के हवाले

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गोरखपुर(ब्यूरो)– भारत-नेपाल सीमा आतंकियो के भारत मे घुसने व भागने के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है| अब तक दर्जनो आतंकी नेपाल सीमा के रास्ते से भारत मे आने के बाद पकड़े जा चुके हैं| खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर गौर करे तो उनके निशाने पर गोरखपुर रहा है| यही व्जह है कि शासन ने बहुत पहले आतंकवादी निरोधी दस्ता(एटीएस) के गठन के बाद गोरखपुर मे भी एक यूनिट खोली गई है| मंगलवार को लखनऊ मे मुठभेड़ के दौरान आतंकी सैफुल मारा गया| इस दौरान गोरखपुर सहित कई बड़े शहरों को हाई एलर्ट किया था लेकिन ग्राउण्ड लेबल पर आतंकियों से निपटने की गोरखपुर में सारी तैयारी हवा-हवाई है|

यह इस बात से तस्दीक हो जाती है कि नेपाल सीमा के नजदीक गोरखपुर मे यदि इस तरह की कोई वारदात हो जाय तो त्वरित कार्रवाई के लिए सिर्फ दो सिपाही उपलब्ध है एैसे मे हाय-तौबा मच सकती है| महिला थाने के पास स्थापित आतंकवादी निरोधी दस्ता के प्रभारी डिप्टी एस.पी की तैनाती अभी तक नही हुई है|

एटीएस मे क्यो नही आना चाहते है पुलिसकर्मी
आतंकवादी निरोधी दस्ते मे पुलिसकर्मी की कमी है यह बिना मुखिया का कार्यालय है गोरखपुर यूनिट की मानटरिंग पूर्वी वाराणसी जोन के एस.पी.संतोष सिंह के पास है| गोरखपुर और आजमगढ़ जिले आतंकी गतिविधियों की लिहाज से काफी संवेदनशील है आजमगढ़ मे एटीएस के दरोगा गीरिश राय है जबकि गोरखपुर यूनिट पर सिर्फ दो सिपाही पोस्ट है एेसे मे आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने और उनसे त्वरित निपटने की बात बेमानी है|

रिपोर्ट-जयप्रकाश यादव
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