गोवंशों के रक्षक परेशान, न ही सरकार और न ही स्थानीय प्रशासन दे रहा है इस ओर ध्यान

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बीघापुर/उन्नाव (ब्यूरो)- बेसहारा आवारा गोवंषों के लिए सरकार ने भले ही अभी तक कोई कदम न उठाए हों, पर क्षेत्र के गांव मेहरवानखेड़ा के ग्रामीण इन आवारा पषुओं के सहारा बन गए हैं। बताते चलें कि क्षेत्र में हजारों की संख्या में घूम रहे आवारा गोवंषों ने किसानों का दिन का चैन और रातों की नींद हराम कर रखा है।

जिसका विकल्प किसानों को नजर नहीं आ रहा है, वहीं मेहरवानखेड़ा के निवासी पूर्व जिलापंचायत सदस्य षिव सिंह ने अन्य ग्रामीणों के सहयोग से इन गौवंषों के लिए मसीहा बन कर उभरे हैं। शिव सिंह ने अपनी निजी जमीन पर अन्य ग्रामीणों के सहयोग से तारों का बाड़ा बना कर आवारा गौवंशों का उसी में पाल रखा है। सभी ग्रामीण बारी बारी से इन बेसहारा गोवंषों की देखरेख कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने चंदा लगा कर भूसा, पुवाल और पानी की व्यवस्था की है। लगभग तीन माह से चल रहे इस आघोशित गौषाला में लगभग 2 सैकड़ा गौवंष हैं। शिव सिंह ने बताया कि उपजिलाधिकारी को इस बात से लिखित रूप से अवगत कराया गया था कि हम किसानों की फसलों को इन आवारा गोवंशों से बचाने के लिए हम लोगों ने बाड़ा बना कर पाल रखा है।

चारे, पुआल, पानी की व्यवस्था हम लोग कर रहे हैं परन्तु यह व्यवस्था लम्बे समय तक नहीं चल पायेगी, कोई दिषा निर्देष दें। किन्तु अभी तक तहसील प्रषासन से कोई भी दिषा निर्देष हम लोगों को नहीं प्राप्त हुए हैं। वहीं इन गोवंशों के देख रेख व सेवा में लगे उमा शंकर , गिरिजा शंकर, दुर्गा शंकर ने बताया कि हम लोग चंदा लगा कर इन जानवरों की व्यवस्था कर रहे हैं। यदि सरकार से कोई मदद नहीं मिली तो हम लोग ज्यादा दिन तक इनकी व्यवस्था नहीं कर पाएंगे।

इन जानवरों के बीमार होने की स्थिति में पशु चिकित्साधिकारी बीघापुर को दी गई थी उसके बाद भी कोई देखने तक नहीं पहुंचा। जिस कारण से 5 गोवंषों की मृत्यु भी हो चुकी है। वहीं कुछ गायों को गर्भावस्था में थीं ग्रामीण पशु पालक इस गौषाला से ले भी गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार से कोई सहायता प्राप्त नहीं होगी और फसलें भी लगभग कटने वाली हैं। उस वक्त इन आवारा गौवंशों का सहारा कौन होगा?

रिपोर्ट- मनोज सिंह
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