सरकार ने न्यायमूर्ति ए.पी. शाह कमिटी की सिफारिशों को स्वीकार किया

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सरकार ने न्यायमूर्ति ए.पी. शाह कमिटी की सिफारिशों को स्वीकार किया, एफआईआई/एफपीआई के पूंजीगत लाभ पर नहीं लगेगा मैट, आयकर अधिनियम में किए जाएंगे उचित संशोधन

01 अप्रैल 2015 से पहले की अवधि में एफआईआई/एफपीआई पर मैट लगाए जाए या नहीं, इस मुद्दे पर न्यायमूर्ति ए.पी. शाह की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की गई थी। इस कमिटी ने 25 अगस्त, 2015 को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

कमिटी ने सिफारिश की है कि एफआईआई/एफपीआई पर मैट प्रावधान ना लगाए जाने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 115जेबी में संशोधन किया जा सकता है। वैकल्पिक रूप से, कमिटी ने यह भी सुझाव दिया है कि एफआईआई/एफपीआई पर मैट का प्रावधान ना लागू किए जाने को लेकर एक सर्कुलर भी जारी किया जा सकता है।

सरकार ने न्यायमूर्ति ए.पी. शाह समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है जिसमें कहा गया है कि 01 अप्रैल 2015 से पूर्व की अवधि में एफआईआई/एफपीआई पर मैट नहीं लगाया जाना चाहिए। एफआईआई पर मैट लगाने के संदर्भ में मामले को स्पष्ट करने के लिए आयकर कानून में संशोधन का निर्णय किया है और इस बीच सीबीडीटी के फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों से कहा जाएगा कि वह एफआईआई के खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाएं।

कमिटी की रिपोर्ट वित्त मंत्रालय की वेबसाइट www.finmin.nic.in और आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है।

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