बदहाली के कगार पर सरकारी अस्पताल

0
41

लालगंज/रायबरेली(ब्यूरो)- खजूरगांव का तीस बेड का सरकारी अस्पताल बदहाली के कगार पर पहुँच चुका है । पूर्व विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह की पहुंच के चलते गंगा कटरी में बसे खजूरगांव में करोडोें की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना हुयी थी। अस्पताल के साथ साथ सरकारी आवासों का निर्माण भी सरकार के द्वारा अस्पताल कर्मियों के रहने के लिये बनवाये गये थे जो वर्तमान मे वीरान होकर धूल धक्कड से पटे पडे है। एक्स रे मैन की नियुक्ति है लेकिन एक्स रे मशीन न होंने के चलते लोगों को एक्स रे की सुविधा नही उपलब्ध हो पा रही है। 24 घण्टे खुलने वाला अस्पताल महज 6 घण्टे ही खुलता है। इमरजेंसी पूरी तरह बन्द है।

कहने को तो अस्पताल सुबह आठ बजे से है लेकिन कभी भी चिकित्सक नौ बजे के पहले नही आते है। भीषण गर्मी के बावजूद ग्लूकोस की बोतलों का भी पूरी तरह से अभाव है। अस्पताल मे सरकारी दवा नाम मात्र की ही मिलती है।अधिकांसतः लोगों को बाहर से खरीदना पडता है। महिलाओं के इलाज के लिये लेडीज डाक्टर कर नियुक्ति भी नही है।अधीक्षक की ड्यूटी भी चार दिन लालगंज अस्पताल मे रहती है, महज दो दिन ही खजूरगांव जाते है। वास्तविक बात तो यह है कि ग्रामीण क्षेत्र मे डाक्टर जाना ही नही चाहते है। कहने को तो डाक्टर राहुल गुप्ता, डॉ. जी के चैरसिया, डॉ. अषोक, डॉ. आदित्य सहित सर्जन व अधीक्षक डॉ. प्रदीप अग्रवाल की नियुक्ति खजूरगांव मे है। अधीक्षक भी ग्रामीण एरिया के अस्पताल मे जाने से बचने के लिये लालगंज सरकारी अस्पताल मे अटैच के नाम पर ड्यूटी लगवा लेते है जबकि गंगा कटरी क्षेत्र का अस्पताल होने के चलते लोगों की भारी भीड अस्पताल पहुंचती है लेकिन सुविधायें न होने के चलते लोगों को निराश होना पडता है। अस्पताल मे लैब टेक्नीसियन की भी नियुक्ति नही है। जिसके कारण खून आदि की जांच भी नही होती है। भाजपा नेता व लालगंज ब्लाक प्रभारी संतोष पाण्डेय ने सीएमओ से खजूरगांव अस्पताल मे सभी सुविधायें उपलब्ध कराये जाने की मांग की है।

रिपोर्ट- राजेश यादव 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY