सरकारी कार्यालय चलता है सड़क पर, मौत के साये में काम करते हैं सरकारी कर्मचारी

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वाराणसी (ब्यूरो) यूपी सरकारी कार्यालयों के बदहाली की सूरत कोई नया नही हैं, सरकारें बदलती गयी पर बदहाल सरकारी कार्यालयों के हालात-ए-सूरत नहीं बदली । ऐसी ही एक और तस्वीर सामने आई है जहाँ मौत के डर से सरकारी कार्यालय खुले आसमान के नीचे चल रहा है या फिर यूं कहें कि फुटपाथ पर सरकारी कागजों पर काम हो रहा है । ये तस्वीर कहीं और की नहीं संसदीय क्षेत्र की है जहाँ क्षेत्रीय खाद्य कलेक्ट्रेट कार्यालय का कामकाज सड़क पर हो रहा है ।

बनारस में सरकारी दफ्तर सड़क पर कलेक्ट्रेट क्षेत्रीय खाद्य कार्यालय जर्जर सुनने में अजीब लग रहा होगा लेकिन आप खुद देखिये कि कैसे सड़क पर ये कार्यालय चलने पर मजबूर है । गुड गवर्नेंस और डिजिटलीकरण का दावा करने वाली योगी सरकार का ऐसा चेहरा वो भी पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में जहाँ कर्मचारी अपने दफ्तर में नहीं सड़क पर टेबल कुर्सी लगाकर ड्यूटी कर रहें हैं। बनारस  के मकबूल आलम रोड स्थित क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी का कार्यालय सड़क पर चलता है, क्योंकि कार्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इतना ही नहीं बारिश के मौसम में दफ्तर में लाखों दस्तावेज सड़ रहें हैं या दीमक की खुराक बन गए हैं। मगर इन्हें सहेजने वाला कोई नही है । यहां काम करने वाले लोग कहते हैं कि भवन की हालत देख के डर लगता हैं इसलिए सड़क पर कार्यालय चला रहे हैं ।

घर-घर बिजली पहुँचाने का दावा करने वाली मोदी सरकार इस कार्यालय में बिजली नहीं पहुंचा पाई है, जिसके कारण यहां लोगो को जब कार्यालय में जाना मजबूरी होती हैं तो वो अपने मोबाइल में लगे टॉर्च के प्रयोग से कागजो पर काम करते हैं । सबसे ज्यादा चौकाने वाली तस्वीर क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के चैम्बर की है जहाँ की कुर्सी और टेबल पूरी तरह प्लास्टिक से कवर है और पानी से सनी हुई है। तो  दफ्तर में काम से आये आम लोग से लेकर ड्यूटीरत कर्मचारी मौत के साये में डरे हुए हैं।

ऐसा नहीं कि इन कर्मचारियों ने इसकी शिकायत आलाधिकारियों से नहीं की है बल्कि बाकायदा लिखित एप्लिकेशन भी दिया हुआ हैं पर सुनने वाला कोई नही, अब नौकरी करना हैं तो इस मौत के साये में ही करना है और कभी टेबल बाहर तो कभी अंदर कर जुगाड़ के सहारे दिन बिताना है।

इस जर्जर भवन के गवाह यहां आने वाले कोटेदार और राशनकार्ड बनाने आने वाले भी हैं जो वर्षो से इस भवन में आते तो हैं लेकिन उतनी ही जल्दी यहां से जाना चाहते हैं । प्रत्येक दिन यहां 100 से ज्यादा व्यक्ति आते हैं । कोई कोटेदार होता हैं तो कोई अपना राशन कार्ड बनवाने आता है, चेहरे अलग होते गए लेकिन इस भवन की शक्ल जर्जर ही रही ।

इस भवन के इस हालात ठीकरा किसे दिया है जो सरकार चली गयी उसे या जो सरकार विकास के नाम से आई हैं उसे ऐसा हमारा सोचना हैं पर यहां काम करने वाले कर्मचारी बिना किसी का कसूर दिए इस भवन से निजात पाना चाहते हैं और वो कब होगा इसका इंतजार इन्हें वर्षो से हैं । बहरहाल 21वी सदी के 17वे साल में सरकारी कार्यालय का ये चेहरा यूपी में होने वाले विकास में एक बड़ा प्रश्नचिन्ह जरूर लगा रहा है ।

रिपोर्ट – त्रिपुरारी यादव 

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