नगला कैथ में नहीं पहुँची सरकारी योजनायें, फाइलों में दबकर रह गया विकास कार्य

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मैनपुरी(ब्यूरो)- गांव की सरकार को बने लगभग 2 बर्ष का समय बीतने को है मगर गांव की जनता आज भी प्रधानों की उपेक्षा की शिकार है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में स्वच्छ भारत मिशन चलाया जा रहा है। आए दिन मिशन की सफलता के गीत गाये जाते है। इसके इतर देश की सर्वाधिक आवादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश में स्वच्छता की कमी के कारण लोग डायरिया, पीलिया और कालरा, दिमागी बुखार जैसी बीमारियों से जूझ रहे है। भारत में बीमारियां फैलने का कारण जानने के लिये सरकार द्वारा वर्ष 2015-2016 में एक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे किया गया। जिसमें सबसे बड़ा कारण स्वच्छता की कमी रही। जिसके कारण डायरिया, बुखार, कालरा जैसी बीमारी फैल रही है।

सर्वे में यह पाया गया कि इस राज्य में स्वच्छता की कमी का मुख्य कारण घरों में शौचालय न होना और है भी तो सही तरीके से संचालित नहीेे है। यहां मानकविहीन शौचालयों का मतलब है, ऐसे शौचालय जिन्हे न तो किसी सेप्टिक टैंक से या गड्डों से जोड़ा गया है। ये वो शौचालय है, जिनमें मल की निकासी और पानी के बहाव का कोई सही तरीका नहीं है।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की ग्राम पंचायत मैनपुरी देहात जिले की दूसरे नम्बर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। इस ग्राम पंचायत आने वाला एक ग्राम नगला कैथ मुख्यालय से सिर्फ 3-4 किलो मीटर की दूरी पर है। इस गांव में लगभग 1500-1600 की आवादी है। मगर इस गांव के लोगों का सरकार की योजनाओं को कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इस गांव की न तो गलियां पक्की है और न ही किसी के यहां शौचालय बनें हुये है। जिनके यहां बने है वह लोग भी उनका सही से प्रयोग नही कर पाते है। क्योंकि उन शौचालय से निकलने वाला मल व पानी वही पास में बने गड्डों में भरा रहता है| जिससेे गंदगी फैलती रहती हैं। क्योंकि गांव में न तो गलियां पक्की बनी हुई और न ही किसी के यहां सही तरीके से शौचालय बने हुये है। इस गांव के लोग पानी के लिये भी परेशान रहते है।

गन्दगी का मुख्य कारण दूषित पेयजल, साफ-सफाई की कमी और शौचालय नहीं होना है। बल्कि पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रहा निमोनिया, नवजात विकार और कुपोषण का खतरा भी है। गंदगी के कारण इस गांव में डायरिया, पीडिया और कालरा, पेटदर्द जैसी बीमारियों से घिरा रहता है। इस गांव के सभी लोग मेहनत मजदूरी करके अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा 

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