अनिमियता के साए में सरकारी स्कूल

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दुमका (ब्यूरो) जिला के जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत सरकारी स्कूलों में अराजकता व्याप्त है जिसका जीता जागता उदाहरण पुतली डाबर पंचायत के प्रार्थमिक विद्यालय चोरडीहा (दक्षिण) का है बस्तु स्थिति यह है कि यहां पढ़ने वाले छात्र चापानल के खराब दुर्दशा के कारण चोरडीहा गांव के बजरंगबली मंदिर के पास प्यास बुझाने के लिए जाते हैं लेकिन यहां की स्थिति तो औऱ अत्यंत ही नारकीय है चापाकल तो सही है लेकिन उसके चारों तरफ भैंस और गोबर के बड़े-बड़े ढ़ेड़ पड़े हैं जिसके चलते बच्चे पानी लेने के क्रम में गोबर के ढेर पर ही गिर जाते हैं बच्चों की इस शिकायत पर जब उपस्थित शिक्षक बीरबल प्रसाद से पूछा गया तो उनका कहना था इसके लिए स्कूल प्रशासन नहीं प्रखंड का शिक्षा विभाग जिम्मेदार है हम लोगों ने कई बार लिखकर अपने से वरीय पदाधिकारी को जानकारी दे चुके हैं |

लेकिन अब तक कोई कार्रवाई विभागीय तरफ से नहीं हो पाई है वही सरकार के द्वारा निर्धारित मैन्यू का स्कूल में समुचित तरीके से कभी नहीं पालन होता है जिसके कारण बच्चे निर्धारित मैन्यू के भोजन से वंचित रह जाते हैं इस स्कूल मैं और कई खामियां हैं जैसे कि बुधवार के दिन बच्चों को अंडा खिलाना अनिवार्य है लेकिन इस स्कूल में बुधवार के दिन दाल भात आलू का सब्जी दिया जाता है दूसरी खामियां खाना बनाने वाली को जलावन नहीं दिया जाता है जिसके कारण बच्चे दूषित भोजन करने को मजबूर हैं तीसरी खामियां भोजन मे इस्तेमाल किए जाने वाले अन्नपूर्णा नमक की क्वालिटी बाजार में बिकने वाले सामान नमक से बेहद ही निम्न स्तर का है ऐसे नमक खाने से बच्चे घेघा रोग और मंदबुद्धि के शिकार हो सकते हैं जब बच्चे मानसिक रूप से बीमार पड़ जाएं तो ऐसी स्थिति में बच्चे को पोषाहार भोजन दिए जाने का क्या औचित्य है यहां तक कि स्कूल में बिजली का कनेक्शन भी नहीं है |

रिपोर्ट – धनञ्जय कुमार

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