खेल मैदान के लिये तरस रहे ग्रामीण युवा 

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चाँदमारी- वाराणसी : हरहुआ विकास खंड के ग्रामीण युवा खेल के मैदान के अभाव से जूझ रहे हैं,जिसकी वजह से ग्रामीण स्तर की प्रतिभाएं या तो गाँव से दूर शहर में जाने को मजबूर हैं या फिर खेल से विमुख हों रहे हैं l ऐसा नही है कि सरकार इसके लिये चिंतित नही है,ग्रामीण स्तर पर युवा खिलाड़ियों के लिये पिछली प्रदेश सरकार ने गाँवों में खेल मैदान बनाने के लिये योजना भी बनाई थी लेकिन शासन के आदेश को उसके ही अधिकारी और कर्मचारी गम्भीरता से नही लिये,नतीजा ग्रामीणों को गांव मे खेल का मैदान पाने का सपना पूरा नही हो सका l गाँवों में पर्याप्त मात्रा मे ग्रामसभा कि काफी जमीनें भी उपलब्ध हैं लेकिन लेखपाल और प्रधान इन जमीनो को अपनी कमाई का जरिया बना लिये हैं,पैसे के आगे उन्हें खेल के मैदान से कोई मतलब नही l

विकास खंड के अहीरौली गांव के युवाओं को भी खेल का मैदान उपलब्ध न होने का मलाल है । अहीरौली गाँव में खेलकूद के मैदान के लिये ज़मीन उपलब्ध था परंतु 1995 में उस ज़मीन पर सरकार ने बच्चों की पढाई के लिये माध्यमिक विद्यालय का निर्माण करा दिया और खेल के लिये दूसरी जगह देने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया ,जिसके बाद ग्रामीण युवाओं और बच्चों को खेलने के लिये ज़मीन उपलब्ध कराने कि मांग की लेकिन उनकी मांग आज तक नही सुनी गयी l गाँव के ही शशि मिश्रा काफी दिनों से खेल मैदान आवंटित कराने के लिये लड़ाई लड़ रहे हैं उनका कहना है कि गाँव में लगभग 3 बीघे कि ज़मीन आबादी कि थी जिसका आराजी नम्बर 343 था जिसे अधिकारियों से खेल मैदान के लिये आवंटित करने कि मांग की गयी परंतु उस ज़मीन को दूसरे गाँवों के लोगों को फर्जी तरीके से पट्टा कर दिया गया,जिसके.खिलाफ कोर्ट मे मुकदमा भी चल रहा है l

उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी प्रांजल यादव को इस सम्बन्ध प्रार्थना पत्र देकर जाँच कराने कि मांग की गयी, जिसमे उन्होंने मामले की जाँच लेखपाल को जाँच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया,लेकिन आजतक मामले मे कोई ठोस कार्रवाई नही हो सकी l जबकि लेखपाल का कहना है कि गाँव के खेल मैदान कि ज़मीन पर विद्यालय बना हुआ है और अन्य ज़मीन काश्तकारी में दर्ज होने के कारण खेल मैदान के लिये दिया जाना मुश्किल है l कमोबेश यही हाल अन्य गाँवों का भी है,प्रधान व लेखपाल के रुचि न लेने के कारण ग्रामीण प्रतिभाएं खेल मैदान के अभाव में दम तोड़ रहीं हैं l अब देखना यह है कि ग्रामीण स्तर के खिलाड़ियों को खेल का मैदान मयस्सर होता है कि नही । वहीं नयी सरकार से ग्रामीणों को काफी उम्मीदें हैं ।

रिपोर्ट–नागेन्द्र कुमार यादव

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