गुलबर्ग सोसाइटी मामला – हिन्दुओं की भीड़ पर पहले जाफरी ने चलाई थी गोली उसके बाद भीड़ हिंसक हुई थी – अदालत

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अहमदाबाद- गुजरात की गुलबर्ग सोसाइटी में 28 फरवरी 2002 को हुए भीषण नरसंहार में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है | इस मामले में कोर्ट ने 36 लोगों को बरी कर दिया था और बीते 17 जून को कोर्ट ने 24 में से 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी और 1 ब्यक्ति को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई वही कोर्ट बाकी के 12 आरोपियों को 7 साल की सजा सुनाई है |

कोर्ट ने कहा हिन्दुओं की भीड़ हिंसा करने के उद्देश्य से नहीं गयी थी –
विशेष एसआईटी अदालत के न्यायाधीस पीबी देसाई ने अपने आदेश में कहा है कि, भीड़ गुलबर्ग सोसाइटी के आस-पास इक्कठा अवश्य थी लेकिन भीड़ वहां पर हिंसा करने के उद्देश्य एकत्र नहीं हुई थी | भीड़ सोसाइटी के बाहर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर रही थी और मुस्लिमों के घरों को आग लगा रही थी |

कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि, लेकिन कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी ने जैसे ही एकत्रित भीड़ के ऊपर गोली बारी की थी जिसमें एक ब्यक्ति की मौत हो गयी थी उसके बाद भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया | इसीलिए कोर्ट यह मानती है कि जाफरी की गोली ने भीड़ को हिंसक रूप लेने के लिए विवश कर दिया था और उसने उत्प्रेरक का काम किया है |

एसआईटी कोर्ट ने यह भी कहा है कि जाफरी के हथियार से कुल 8 राउंड गोलिया चली थी जिसमें एक ब्यक्ति की मौत हो गयी थी और 15 अन्य लोग घायल हो गए थे जिसके बाद भीड़ ने वह हिंसक रूप ले लिया था जिसके बारे में कल्पना कर पाना भी असंभव है | कोर्ट ने कहा है कि हम यह मानने से साफ़ इनकार करते है कि जाफरी निर्दोष था वह भी एक हत्यारा ही था लेकिन उसके कृत्य की वजह से भीड़ ने जो किया उसे भी माफ़ नहीं किया जा सकता है |

कोर्ट घटना को षडयंत्र बताने से किया इनकार –
कोर्ट ने इस घटना को षडयंत्र मानने से साफ़ इनकार करते हुए कहा है कि 28 फरवरी को सुबह से करीब 1:30 बजे तक पूरे गुजरात में कही कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई थी लेकिन 1:30 बजे के बाद जो हुआ वह भीषण पीड़ा दयाक और अप्राकृतिक है लेकिन वहां कोई षडयंत्र नहीं हुआ था बल्कि जाफरी की गोली ने इस पूरी घटना में एक तरह से उत्प्रेरक का काम किया था | लेकिन जाफरी की हरकत की वजह से हम भीड़ को भी निर्दोष करार नहीं दे सकते है |

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