गुरुनानक मानव धर्म के उद्धारक थे:संत श्रीपाल

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शाहाबाद/हरदोई (ब्यूरो) – शिव सत्संग मंडल आश्रम हुसेनापुर धौकल पर आयोजित संगत पंगत में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मंडल प्रमुख संत श्रीपाल ने कहा कि गुरु नानक देवजी सिख धर्म के संस्थापक ही नहीं, अपितु मानव धर्म के उद्धारक थे। वे केवल किसी धर्म विशेष के गुरु नहीं अपितु संपूर्ण सृष्टि के जगद्गुरु थे। ‘नानक शाह फकीर। हिन्दू का गुरु, मुसलमान का पीर। उनका अवतरण भारत की पावन धरती पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 को लाहौर से करीब 40 मील दूर स्थित तलवंडी नामक गांव में हुआ था। इस संसार के प्राणियों की त्राहि-त्राहि को सुनकर परमेश्वर ने इस धरती पर गुरु नानक को पहुंचाया। नानक का जन्मस्थल अलौकिक ज्योति से भर उठा था। उनके मस्तक के पास तेज आभा फैली हुई थी।

पुरोहित पंडित हरदयाल ने जब उनके दर्शन किए उसी क्षण भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक ईश्वर ज्योति का साक्षात अलौकिक स्वरूप है। प्रचार प्रमुख महावीर सिंह ने कहा कि बचपन से ही गुरु नानक का मन आध्यात्मिक ज्ञान एवं लोक कल्याण के चिंतन में डूबा रहता। बैठे-बैठे ध्यान मग्न हो जाते और कभी तो यह अवस्था समाधि तक भी पहुंच जाती।उन्होंने कहा कि गुरु नानक देवजी का जीवन एवं धर्म दर्शन युगांतकारी लोकचिंतन दर्शन था। उन्होंने सांसारिक यथार्थ से नाता नहीं तोड़ा। वे संसार के त्याग संन्यास लेने के खिलाफ थे, क्योंकि वे सहज योग के हामी थे। उनका मत था कि मनुष्य संन्यास लेकर स्वयं का अथवा लोक कल्याण नहीं कर सकता, जितना कि स्वाभाविक एवं सहज जीवन में।

इसलिए उन्होंने गृहस्थ त्याग गुफाओं, जंगलों में बैठने से प्रभु प्राप्ति नहीं अपितु गृहस्थ में रहकर मानव सेवा करना श्रेष्ठ धर्म बताया। ‘नाम जपना, किरत करना, वंड छकना’ सफल गृहस्थ जीवन का मंत्र दिया। यही गुरु मंत्र सिख धर्म की मुख्य आधारशिला है। यानी अंतर आत्मा से ईश्वर का नाम जपो, ईमानदारी एवं परिश्रम से कर्म करो तथा अर्जित धन से असहाय, दुःखी पीड़ित, जरूरततमंद इंसानों की सेवा करो। गुरु उपदेश है, इस प्रकार श्री गुरुनानक देवजी ने अन्न की शुद्धता, पवित्रता और सात्विकता पर जोर दिया। इसी प्रकार ईश्वरीभाव एवं भय के साथ पूरी ईमानदारी के साथ कर्म करने की बात भी गुरुजी ने कही। संयोजक अम्बरीष कुमार सक्सेना ने कहा कि गुरुनानक ने सभी धर्मों को श्रेष्ठ बताया। जरूरत है धर्म के सत्य ज्ञान को आत्मसात कर अपने व्यावहारिक जीवन में लाने की।

गुरुजी ने धार्मिक एवं सामाजिक विषमताओं पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने वाणी में हिन्दू और मुसलमान दोनों के लिए एकात्मकता के बीज बोए। उनका मत था कि संपूर्ण सृष्टि का ईश्वर एक है। हम सब तो उसके बंदे हैं। हमारा धर्म एक है। गुरुजी स्वयं एकेश्वर में पूर्ण विश्वास रखते थे। उनका दृष्टिकोण समन्वयवादी था।व्यवस्था प्रमुख यमुना प्रसाद ने कहा कि गुरुनानक देवजी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व जितना सरल, सीधा और स्पष्ट है, उसका अध्ययन और अनुसरण भी उतना ही व्यावहारिक है। गुरु नानक वाणी, जन्म साखियों, फारसी साहित्य एवं अन्य ग्रंथों के अध्ययन से यह सिद्ध होता है कि गुरुनानक उदार प्रवृत्ति वाले स्वतंत्र और मौलिक चिंतक थे। एक सामान्य व्यक्ति और एक महान आध्यात्मिक चिंतक का एक अद्भुत मिश्रण गुरु नानकदेवजी के व्यक्तित्व में अनुभव किया जा सकता है। ‘वे नबी भी थे और लोकनायक भी, वे साधक भी थे और उपदेशक भी, वे गृहस्थ भी थे और पर्यटक भी।’

संगत पंगत में हरदोई के प्रमुख समाजसेवी सुधीर श्रीवास्तव जागृति मंच केअनुराग श्रीवास्तव ब्लॉक प्रमुख रोली गुप्ता ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि नवनीत गुप्ता डॉ मनीष शर्मा उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष नलिन गुप्ता भाजपा के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद रस्तोगी दीपक बाजपेयी सत्येंद्र श्रीवास्तव धर्मेन्द्र प्रताप अनिल कुमार शर्मा जनार्दन श्रीवास्तव देव सिंह संजय हरिओम मोहित श्रीवास्तव पवन भारद्वाज यमुना प्रसाद श्री राम अजयपाल भाजपा महामंत्री नीरज श्रीवास्तव निगोही के अध्यक्ष विनोद मिश्रा राम निवास आलोक श्रीवास्तव भैयालाल रविलाल नन्हेलाल राज कुमार कुलदीप श्रीवास्तव रमाकांत मौर्य गोपाल अग्निहोत्री स्वामी शांतानंद समेत अनेक अभ्यागतों का समागम हुआ।इस धार्मिक आयोजन का शुभारम्भ स्वामी शांतानंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर,सामूहिक ईश प्रार्थना से किया।मंडलाध्यक्ष आचार्य अशोक ने आये हुए सभी सत्संगीजनों व अभ्यागतों के प्रति आभार व्यक्त किया।समापन पर सभी ने 25 नवंबर को कालागाड़ा में वार्षिक धर्मोत्सव मनाने का शिव संकल्प लिया।

रिपोर्ट – अजीत सिंह

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