गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरू हरगोविंद साहिब का प्रकाश वर्ष पर्व मनाया गया

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रायबरेली (ब्यूरो)- गुरूद्वारा श्री गुरू सिंह सभा में सिक्खों के छठें गुरू श्री गुरू हरगोविंद साहिब का प्रकाश पर्व उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। पाठा, कथा, कीर्तन, मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी कुलविंदर सिंह व हजूरी रागी भाई अमर सिंह ने यिका। मुख्य गं्रथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह ने गुरूजी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्री गुरू हरगोविंद सिंह साहिब पांचवे गुरू अरजन देव के पुत्र थे। उन्होंने पिता के उद्देश्य को अपने जीवन में मानते हुये शस्त्र व शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की। गुरू गद्दी संभालते ही बाबा बुड्डा जी ने मीरी पीरी की दोनो तलवारो गुरू हरगोविंद साहिब की पहनाई। यहीं से सिक्ख इतिहास में एक नया मोड़ आता है। गुरू जी एक महान यो़ा थे। वह चाहते थे कि सिक्ख कौम शांति, भक्ति एवं धर्म के साथ-साथ अत्याचार एवं जुल्म का मुकाबला करने के लिये सशक्त बने। गुरू जी की प्रेरणा से भव्य अकाल तख्त साहिब का निर्माण हुआ। आपने अकाल तख्त साहिब को सिक्ख समाज में सर्वोच्च संस्था के रूप में पहचान प्रदान की।

धार्मिक मंत्री सुरेंद्र सिंह मोंगा ने कहा कि गुरू जी को संगत घोड़े एवं शस्त्र भंेट करते थे। मुगलों ने कई राजाओं को बंदी बनाकर रखा था। जिसका गुरूजी ने विरोध किया तो गुरूजी को भी ग्वालियर के किले में बंदी बनाया गया। इस पर महान सूफी फकीर मीयामीर ने गुरू जी की महानता एवं प्रतिभा से परिचित कराया। इस पर गुरू जी को ग्वालियर से आजाद ही नहीं किया बल्कि वहां जो भी राजा बंदी बनाये गये थे उन्हें भी साथ ले जाने की बात कही। इसीलिये गुरू गोविंद साहिब को बंदीछोड़ दाता भी कहा जाता है।

ग्वालियर में बंदीछोड़ गुरूद्वारा भी है। इस अवसर पर अध्यक्ष बसंत सिंह बग्गा, हरजीत सिंह गांधी, गुरू बक्श सिंह बग्गा, पपिंदर सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह, हरचरण सिंह मोंगा, तेजपाल सिंह मोंगा, हरजीत सिंह तनेजा, अवतार सिंह गांधी, गुरमीत सिंह, गुरदीप सिंह, छोटू सिंह, गुरमेज सिंह, रोहित गांधी आदि मौजूद रहे।

रिपोर्ट- राजेश यादव

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