मानस आदर्श जीवन दर्शन: गया प्रसाद शास्त्री

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सलोन, रायबरेली। सलोन में चार दिवसीय श्री राम चरित मानस सम्मेलन के समापन अवसर पर मानस मर्मज्ञ गया प्रसाद शास्त्री ने कहा कि रामचरितमानस पूरे मानव जगत का आदर्श जीवन दर्शन है। मानस में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अनोखा संगम दिखाई पडता है।

माता-पिता, गुरुजनों और का सम्मान, भाई-भाई में परस्पर प्रेम, त्याग और सहनशीलता का यह उदाहरण कहीं अन्यत्र नहीं दिखाई पड़ता है। स्वामी विवेकानंद ने भी इसी के आधार पर पूरे विश्व को भारत के सामने नतमस्तक कराया था। आज जब लोग भौतिकता की ओर भाग रहे हैं तो आपने स्वार्थ और लालच में भाई-भाई का खून बहा रहा है व मर्यादा और रिश्तों को कलंकित कर रहा है। ऐसे में आवश्यकता है कि एक बार फिर से हम सभी सत्य सनातन धर्म की ओर लौटें और रामचरित मानस को आत्मसात करें ताकि फिर से रामराज्य आ सके।मानस वक्ता राज किशोर तिवारी ने मानवजीवन जीने का सुंदर वर्णन किया उन्होंने बताया कि मानव जीवन पाना सौभाग्य की बात है। जिन महान कर्मों, कठिन तपस्या के चलते यह जीवन मिलता है उसे मानव धरती पर आते ही उसे भूलकर सांसारिक मोह में फंसकर रह जाता है। जितने सत्कर्मों के बल पर मानव जीवन मिलता है उससे ज्यादा सत्कर्म करने वाले व्यक्ति को ही रामकथा सुनने का अवसर मिल पाता है। मानव का मन भागवत कार्य में लगने में बड़ा आनाकानी करता है लेकिन एक बार लग गया तो भगवान भी उसे हटा नहीं सकता। पूरी दुनियां में रामायण एक नहीं है। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस सभी ग्रंथों का मूल है। जिस मानव ने रामचरित मानस का श्रवण कर लिया समझो सभी का श्रवण कर लिया। भगवान राम की इच्छा से ही सब कुछ होता है।सिद्ध सदन रिछारिया ने कहा कि व्यर्थ की चिंता करोगे तो जीवन भर परेसान रहोगे।प्रभु का गुणगान करो और अपने नेक कर्मो से सत्य के पथ पर चलोगे तो ईश्वर सर्वत्र साथ रहेगा।लक्ष्मी नारायणी ने माता पार्वती की महिमा का बखान किया।इस दौरान जय जय श्री राम के जयकारे से राम लीला मैदान गुंजायमान रहा।जिसके बाद मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की भव्य आरती के साथ चार दिवसीय श्री राम चरित मानस सम्मेलन का समापन किया गया।संरक्षक चन्द्र शेखर रस्तोगी,नरेंद्र रस्तोगी,शिवेंद्र सिंह,आदि लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट – राजेश यादव

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