हादसे के बाद नियम को कडाई से पालन कराने पर जोर

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वाराणसी (ब्यूरो)- एटा जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसा एक बार फिर प्रशासन व निजी स्कूल प्रबंधन के लापरवाही को उजागर कर दिया। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण हर बार मासूम बच्चों को अपनी जान गवानी पड़ती है, जिससे माताओं की कोख सूनी होती है। समय के साथ सिर्फ स्कूल वाहनों के हादसों की जगह बदलती है, परिणाम वहीं रहता। हर हादसे के बाद राज्य व जिला प्रशासन स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई व जांच बात करता है और आरटीओ नियमों का कड़ाई से पालन कराने की बात करता है, लेकिन कुछ समय बाद निजी स्कूल वाले नियमों को ताक पर रखकर अपने ढर्रे पर चलने लगते हैं। बता दें कि गुरुवार को एटा जिले में पटियाली-अलीगंज रोड पर स्कूली बस व ट्रक के बीच भीषण टक्कर में दो दर्जन से अधिक मासूम बच्चों की जान चली गई।

वाराणसी आरटीओ (ई) राधेश्याम ने बताया वाहन स्कूल के नाम पर रजिस्टर होना चाहिए। यदि किसी एजेंसी से अनुबंध पर वाहन लिया गया हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। बस पीले रंग की होनी चाहिए, जिस पर ब्राउन या नीले रंग की पट्टी होनी चाहिए। बस के खिड़कियों पर बाहर की ओर से रॉड लगा होना चाहिए। बस 15 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही वाहनों का हर साल फिजिकल टेस्ट कराना चाहिए। सिर्फ नये वाहनों पहली बार दो साल बाद फिजिकल टेस्ट होता है।

ड्राइवर्स का रेगुलर हो फिजिकल टेस्ट –
आरटीओ अधिकारी ने बताया कि वाहन के साथ ही स्कूल प्रबंधन को ड्राइवर्स का भी फिजिकल टेस्ट कराना चाहिए। स्कूल वाहन के लिए पांच साल पुराने कमर्शियल लाइसेंस वाले ड्राइवर को रखना चाहिए।

जिले में हैं 1954 स्कूल वाहन –
आरटीओ अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 1954 स्कूल वाहन आरटीओ में दर्ज हैं। इसमें से 950 वाहनों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2016 से दिसंबर 2016 तक कुल 144 स्कूली वाहनों का चालान कर बंद किया जा चुका है। इसके साथ ही 20 जनवरी से तीन तक स्कूल वाहनों की चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।

ये हैं नियम-
आरटीओ (ई) राधेश्याम ने बताया कि स्कूल बस के लिए निम्न नियम हैं-

1- बसों में बैग रखने के लिए सीट के नीचे व्यवस्था होनी चाहिए |

2-बसों में टीचर हो, जो बच्चों पर नजर रखे |

3- वाहन पर पीला रंग हो जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम होना चाहिए|

4- एजेंसी से अनुबंध पर ली गई बसों पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखें|

5- स्कूल बसों में सीट क्षमता के अनुरूप ही छात्र को बिठाएं|

6- बसों में स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए|

7- स्कूली बसों में फर्स्ट एड की व्यवस्था होना चाहिए|

8- वाहन चालक को न्यूनतम पांच वर्ष का वाहन चालने का अनुभव होना चाहिए|

9- प्रत्येक बसों में फायर एक्सटिंग्युशर लगाएं|

10- बसों के आगे-पीछे स्कूल बस अंकित हो|

11- प्रत्येक स्कूल बस में हॉरिजेंटल ग्रिल लगे|

12- बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था होना चाहिए|

13- बस चालक के अलावा एक और बस चालक साथ में होना जरूरी।
रिपोर्ट-दीपनारायण यादव/दयानन्द तिवारी

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