हास्य: क्रिया एक लाभ अनेक

आपकी बात –  हास्य के अनेक शारीरिक व मानसिक लाभ हैं, जिन्हें पूर्णरूप से पाने एवं साथ में आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करने का सरल, सर्वसुलभ व अत्युत्तम साधन है| इसका रहस्य एक साधक द्वारा बताया गया कि ‘देव-मानव हास्य प्रयोग’। यह वर्तमान युग की चिंता, तनाव, अनारोग्य आदि असंख्य समस्याओं से निजात पाने हेतु एक प्रभावशाली, अनुभवसिद्ध प्रयोग के रूप में लोकप्रिय हो रहा है।

इसमें सर्वप्रथम एकाध मिनट तक तेज गति से तालियाँ बजाते हुए भगवन्नाम का तेजी से आवर्तन किया जाता है और भगवदभाव को उभारा जाता है। फिर दोनों हाथों को ऊपर की उठाकर दिल को भगवत्प्रेम से भरते हुए भगवत्समर्पण की मुद्रा में दिल खोलकर हँसा जाता है।

प्रयोग की शुरुआत के दिनों में हँसी न भी आये तो भी भगवान की, अपने इष्ट की किसी लीला को याद करके थोड़ा यत्नपूर्वक हँसें। जैसे- यदि आप भगवान श्री कृष्ण के भक्त हैं तो उनकी माखन चोरी की लीला, गोपी की चोटी और उसके पति की दाढ़ी बाँध देने की लीला का स्मरण करें। कुछ ही समय के अभ्यास से आप देखेंगे कि भगवदभाव, भगवत्प्रेम, भगवत्समर्पण आपको एक ऐसी मधुर, स्वाभाविक हँसी प्रदान करेगा कि आप इस प्रयोग के प्रेमी बन जायेंगे। तत्पश्चात बच्चों को बतायें कि ‘एक हाथ आपका और दूसरा हाथ भगवान का है, भगवान और अपना हाथ मिलाओ तो भगवान के साथ आपकी दोस्ती पक्की हो जायेगी।’ अब बच्चे राम, राम या हरि ॐ अथवा भगवान को कोई भी नाम लेते हुए तेजी से ताली बजायें, फिर दोनों हाथ ऊपर उठाकर जोर से हँसें।

लाभः हास्य प्रयोग करने से फेफड़ों का व्यायाम हो जाता है। शरीर के अनेक रोग और मन के दोष दूर होते हैं। शरीर की 72 हजार नाड़ियों की शुद्धि होती है। जब हम ताली बजाते हुए अहोभाव से ‘हरि ॐ’ कहते हुये हाथों को आकाश की ओर उठाते हैं तो हमारी जीवनीशक्ति बढ़ती है और मानसिक तनाव, खिंचाव, दुःख-शोक सब दूर हो जाते हैं। जब भी जीवन में मानसिक तनाव, खिंचाव, दुःख शोक आये तो उस समय यह प्रयोग करने से हृदय में आनंद और शांति का संचार होने लगता है। इसलिए प्रतिदिन दिन में एक बार हास्य प्रयोग तो अवश्य करना चाहिए।

दिल खोलकर हँसना निरर्थक, दुःखदायक विचारों की श्रृंखला को तोड़ने की उत्तम एवं सर्वसुलभ कुंजी है। हँसमुख एवं प्रसन्न लोगों के पास रोग व दुःख ज्यादा देर नहीं टिक पाते और वे चिंतित मनुष्यों की अपेक्षा अपने सभी कार्यों को अधिक सफलतापूर्वक करते हैं। प्रसन्न व्यक्ति अधिक आयु तक युवा व सुन्दर बना रहता है। आनंदमयी हँसी हमारे हृदय के पट खोल देती है, मन का सारा बोझ क्षणमात्र में मिटाकर उसे फूल सा हलका बना देती है। हँसता हुआ व्यक्ति स्वयं तो लाभ उठाता ही है, साथ ही अपने साथियों को भी लाभ पहुँचाता है।

हँसने वाले का साथ सारा संसार देता है और उदास-निराश का कोई नहीं। प्रतिदिन हँसने का थोड़ा अभ्यास करके अपनी आयु को बढ़ाया जा सकता है। किसी की कटु, अपमानजनक या कुत्सित बात पर मायूस होकर दुःखी होने की बजाय उसे हँसी-हँसी में टाला जा सकता है। इसी प्रकार आपसी मनमुटाव भी हँसकर तत्काल मिटाया जा सकता है। हँसना हमारे शरीर के सुरक्षातंत्र की क्रियाशीलता और गुणवत्ता को बढ़ाता है। दिल से खुलकर हँसना जीवन में संघर्षों से जूझने की शक्ति प्रदान करता है। इससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है और माहौल खुशुनमा बना रहता है।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार हँसने से हृदय की धमनियाँ ज़्यादा प्रभावी रूप से कार्य करती हैं। इससे हृदय की बीमारियाँ पास नहीं फटक पातीं परन्तु जिन्हें हृदयरोग हो चुका है उन्हें बहुत बल लगाकर नहीं हँसना चाहिए।

हास्य हमारे शरीर में ‘एण्डोर्फिन’ की मात्रा बढ़ाता है, जो प्राकृतिक दर्द निवारक है। यह रक्तचाप को नियंत्रित रखता है और तनाव को दूर भगाता है। खुलकर हँसने से व्यग्रता, क्रोध, चिड़चिड़ापन – इन सबसे छुटकारा पाया जा सकता है। जब हम हँसते हैं तो पहले की अपेक्षा ज़्यादा साँस अंदर लेते हैं, इससे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन फेफड़ों में जाती है और आप स्वयं को तरोताजा महसूस करते हैं। हँसना उन लोगों के लिए और भी अधिक लाभकारी है, जो बैठे रहने का कार्य करते हैं और जो काफी समय बिस्तर व पहियेवाली कुर्सी पर बैठे रहकर बिताते हैं।

हँसने से माँसपेशियों में खिंचाव कम हो जाता है जिससे आराम मिलता है। नियमित हँसने से सिरदर्द, दमा, जोड़ों की सूजन एवं रीढ़ के जोड़ों से संबंधित तकलीफों में कमी पायी जाती है। हँसने से रोगप्रतिकारक शक्ति भी बढ़ती है।

हास्य प्रयोग से रोग प्रतिकारक शक्ति बढाती है, tumor की वृध्दि नही होती, glucose नियंत्रण होता है, हास्य में भगवान का नाम हो तो बहुत कल्याणकारी है|

रिपोर्ट- अवनीश मिश्र

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here