हाजी शमीम मास्टर एवं उनकी पत्नी हुए हज़ के लिए रवाना


जालौन (ब्यूरो)- नारा-ए-तकबीर अल्लाह हो अकबर की सदाओं के बीच नगर से हाजी शमीम मास्टर एवं उनकी पत्नी हज यात्रा के लिए रवाना हुए। इससे पूर्व मौलानाओं ने खिताब कर हज के अरकान बताए।

हज यात्रा इंसान को गुनाहों से मुक्ति दिलाने के साथ सच्चाई के रास्ते पर चलने को प्रेरित करती है। इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण अरकानों में से एक हज के अरकान अदा करने के लिए नगर से भी यात्रियों के जाने का क्रम जारी है।

इसी कड़ी में नगर से मोहल्ला रापटगंज से सभासद नफीस सिद्दीकी के पिता मोहम्मद शमीम मास्टर व उनकी पत्नी बदरून भी हज यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान मौजूद लोग अल्लाहु अकबर, लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक के नारे लगा रहे थे। उन्हें रवाना करने के लिए परिवारीजनों के साथ रिश्तेदार, मुहल्लेवासियों सहित तमाम लोग पहुंचे। लोगों ने उन्हें फूल मालाओं से लादकर उन्हें विदा किया और दुआओं के लिए कहा। वे यहां से लखनऊ जाएंगे, जहां से आगे की यात्रा शुरू होगी।

हज पर जाने से पहले उन्होंने कहा कि वे दुआ करेंगे कि उनके क्षेत्र और देश में खुशहाली का राज हो। इलाका तरक्की करे और लोग एक दूसरे के साथ भाईचारे से ही सदा रहते रहें। उनकी वापसी 40 दिन बाद सितंबर महीने में होगी। इस मौके पर हाजी सत्तार मास्टर, लुकमान शेख मुंबई, मोहम्मद नफीस, अब्दुल नईम, मोहम्मद आसिफ, इकबाल मंसूरी, गुड्डू, मुवीन गोरा वाले, जाबिर, बन्ने हाफिजजी, असफाक, अकबर आदि मौजूद रहे।

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