मुसलमान राम जन्मभूमि हिन्दुओं को सौंप दे – स्व. अटल बिहारी वाजपेयी

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श्री राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का मामला दशकों से विभिन्न कोर्टों में चक्कर काट रहा है, जब भी चुनाव आता है विभिन्न पार्टियों के नेताओं के बयान आने शुरू हो जाते है और फिर से हिन्दू और मस्लिम दोनों ही पक्षों के लोग सभी मानवीय संवेदनाओं को किनारे रखते हुए एक दूसरे पर बाहें सिकोड़ने लगते है। ऐसा नहीं है कि जब से देश की सत्ता नरेंद्र मोदी के हाथों में आयी है तभी से इस मामले ने तूल पकड़ा है। समय-समय पर इस मामले ने पहले भी कई बार अपना असर दिखाया है और वह कई बार काफी वीभत्स भी रहा है। जैसे मुलायम सिंह यादव की सरकार में कार सेवकों के ऊपर गोलियां चलवाना जिसके लिए बाद में मुलायम का नामकरण भी हुआ और नेता जी को मुल्ला मुलायम से सम्बोधित किया गया। समय-समय पर कुछ बुद्धिजीवी नेताओं ने इस मामले पर संसद में और संसद के बाहर बहस भी की है। इसी तरह की एक चर्चा को आज मैं आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

दरअसल आपको बता दूँ की यह पूरी जानकारी एक पत्र पर आधारित है और इस पत्र को खुद देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तब के बड़े कम्युनिष्ट नेता हीरेन मुखर्जी को लिखा था। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने इस पत्र में वैसे तो कई विषयों पर बात की थी जैसे हिंदू होने पर गर्व, लेकिन उन्होंने कहा की सबसे अधिक गर्व उन्हें भारतीय होने पर है इत्यादि। परन्तु उनका विशेष जोर इस बात पर था कि हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच दशकों से चले आ रहे इस मतभेद को कैसे समाप्त किया जा सके और देश में शांतिपूर्ण ढंग से कैसे राम मंदिर का निर्माण हो सके।

हीरेन मुखर्जी को लिखे अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने कांग्रेस को देश में उत्पन्न हुए सांप्रदायिक तनाव का बड़ा जिम्मेदार माना है, उन्होंने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए यह भी कहा कि कांग्रेस सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मिजोरम में एक क्रिश्चन सरकार गठन भी सम्रदायिकता के आधार पर किया है और यहाँ तक की कांग्रेस में केरल में सत्ता में बने रहने के लिए मुस्लिम लीग तक से हाथ मिलाने में गुरेज नहीं करती है। अटल बिहारी वाजपेयी ने हीरेन मुखर्जी को लिखे अपने इस पत्र में जम्मू कश्मीर के सन्दर्भ में कहा है कि कांग्रेस ने वोटों की खातिर 1983 में हिन्दुओं की भावनाओं को भड़काकर भी वोट लेने में गुरेज नहीं किया।

अटल जी अपने पत्र में लिखते कि वह यह कभी नहीं चाहते कि हिन्दुस्तान में किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव रहे इसके लिए उन्होंने कहा कि मैंने महाराष्ट्र में एक सभा में सुझाव दिया था कि सभी मुसलामानों को चाहिए कि बहुसंख्यक हिन्दुओं की भावनाओं का आदर करते हुए वह स्वयं ही हिन्दुओं को वह स्थान मंदिर बनाने के लिए दे दें और हिन्दू भी मुसलामानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उस स्थान से थोड़ी दूरी पर बिना उस विवादित ढाँचे को गिराए अपने मंदिर का निर्माण कर लें। लेकिन अफ़सोस जताते हुए अटल जी आगे लिखते है कि लेकिन उस समय उनके इस सुझाव पर किसी ने भी गौर नहीं किया। उन्होंने कहा कि मैंने बाद में भी जब भारत के तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह द्वारा सभी विपक्षी नेताओं की एक बैठक बुलाई गयी थी तब मैंने उसमें भी यह सलाह दी थी लेकिन तब सैयद सहाबुद्दीन को मेरी सलाह ठीक नहीं लगी थी।

अटल जी ने हीरेन मुखर्जी को सम्बोधित करते हुए आगे लिखा है कि, “मेरी इस बात से आप भी सहमत होंगे कि इस मामले में देरी होने से दोनों ही पक्षों में सख्ती आयी है, दोनों ही पक्षों का रवैया बेहद सख्त हो गया है और कहीं न कहीं इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी ही होगी। क्योंकि शुरू से ही इस मामले में देरी की गयी है और इसे उलझा भी दिया गया है। हो सकता है कि, सरकारी पार्टी इसे और लटकाना चाहती हो ताकि रामजन्मभूमि और बाबरी विवाद का कार्ड चुनाव के समय उस तरह से खेला जाय जिससे वह सत्तरूढ़ पार्टी के हक़ में हो।

 

दरअसल आपको यहाँ पर एक बात और जानना जरूरी है, जब यह मामला कोर्ट में चल रहा था उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कोई भी कोर्ट इस मामले का समाधान नहीं खोज सकती है, अटल जी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया था, बड़े सारे लोग अटल बिहारी वाजपेयी पर हमलावर हो उठे थे। उस वाकये का जिक्र करते हुए श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखा है कि अदालत इस मामले को हल नहीं कर सकती है से मेरा केवल यह मतलब था कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में जब विवाद ने भावनाओं को छुआ हो खासकर धार्मिक भावनाओं को तो ऐसे मामलों में आये आदेशों को लागू करवाना बेहद कठिन होता है।

अटल जी ने जोर देकर इस बात को कहा है कि मुसलामानों को आगे बढ़कर इस जमींन को हिन्दुओं को दे देनी चाहिए और हिन्दुओं को भी मुसलामानों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पत्र के माध्यम से हीरेन मुखर्जी को हिन्दुओं की भावनाओं के बारे में बताते हुए लिखा है कि हिन्दू बहुसंख्यक होते भी आज हिन्दुओं का एक बड़ा पक्ष यह सोचने पर विवश है कि उसके साथ अन्याय हो रहा है। अटल जी ने यह बात आज से बहुत पहले कही थी लेकिन आज के परिवेश में जिस तरह से राम के नाम का और हिन्दू-मुस्लिम सद्भावना का इस्तेमाल राजनीति के लिए जिस तरह से हो रहा है उससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी की चिंता बिलकुल वाज़िब थी।

आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी, हमें कमेंट कर अवश्य बतायें, जल्द ही मिलेंगे एक और दिलचस्प कहानी के साथ तब तक के लिए नमस्कार।

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