एशिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट एक्सपो में छायी भदोही की वाल हैंगिंग कालीनें 

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भदोही(ब्यूरो)-
पश्चिमी मुल्कों के आफिसों और घरों में अपनी खूबी का जलवा बिखेरने वाली भारतीय कालीन का भविष्य बेहतर और उज्जवल दिख रहा है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में कालीन निर्यात संवंर्द्धन परिषद यानी सीईपीसी द्वारा आयोजित 33 वें कारर्पेट एक्सपों के परिणाम बेहद उत्साह जनक आए हैं। भारतीय कालीनों का जलवा दिखा है। कालीन निर्यातकों और उद्योमियों ने बाजार की नब्ज भांपते हुए , कालीन की डिजाइन और उसका फंडा भी बदल दिया है। अब बाजार की जरुरत को देखते हुए कालीन बुनाई की जा रही है। अब सिर्फ फर्श पर ही नहीं दिवालों पर टांगने के लिए भी नेचुरल लुक में कालीन छोटे आकार में बनायी जा रही है। इस बार के मेले की खासियत यह रही की दुनिया की सबसे मंहगी कालीन यहां उपलब्ध थी। जिसके निर्माण में तीन साल से अधिक का वक्त लगा। कालीन मेले में 390 से अधिक विदेशी खरीददारों में भारतीय कालीन को पसंद किया और उसकी खरीद के लिए रजिस्टेशन कराया। इस दौरान काफी संख्या में गणमान्य व्यक्ति वहां पहुंचे। भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त में मेले में निर्यातकों का हौसला बढ़ाने के लिए पहुंचे। इस बार के एक्सपो से निर्यातकों को बड़ी उम्मीद दिख रही है।

सीईपीसी के दूसरे वाइस चैयरमैन तथा मैमर्स हन्नांस ओरिएंटल रग्स उमर हमीद ने मेले में सबसे मंहगी कालीन का प्रदर्शन किया। उनकी यह कालीन बेहद अजूबी थी। उमर के अनुसार 9 /12 फुट के इस कालीन निर्माण में साढे़ तीन साल का वक्त लगा और इसमें 2500 गांठें हैं। इसे बुनाई की खास प्रक्रिया सिन्नाह कहा जाता है। यह इरान में भी उपलब्ध है लेकिन उसकी बुनाई का तरीका अलग है। उनके अनुसार यह सबसे मंहगी कालीन है। क्योंकि इसके निर्माण में काफी वक्त के साथ तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। यह बेहद मुलायम और मखमली कालीन है।

डामेटैक्स इंटरनेशनल टेड फेयर हैनोवर जर्मनी में 2017 का कारर्पेट डिजाइन एवार्ड पाने वाले नोमान वजीरी ने कालीन के अनूंठे डिजाइन के बारे में बायरों को जानकारी दिया। उन्होंने एक ऐसी मानोक्रोम प्लेट में बनी कालीन दिखाई जो सिर्फ दो रंगों से बनी थी। उसे फर्श पर लगाने के बजाय वाल हैंगिंग के लिए तैयार किया गया था। यह पूरी तरह हाथ से बुनी थी और जिसका आकार 8 /10 फीट थी। जिसे तीन बुनकारों ने तीन महींने में मिलकर बनाया। उनके अनुसार अब दिवालों पर पेंटिंग के बजाय खूबसूरत नैचुरल कालीन टांगने का वक्त आ गया है। यह कालीन बाजार का नया टेंड हैं। कपूर कार्पेट की पांचवी पीढ़ी के विजय कपूर ने बताया कि उनकी पीढ़ी ने 1903 में इसकी शुरुआत की 1924 में ब्रिटिश में आयोजित एंपायर एक्जीबेसन में द सर्टीफिकेट आफ आनर मिला था। वह सरकार से कालीन की कीमतों में लचीलापन लाने की बात करते हैं। यह एक्सपो भारत सरकार की तरफ से आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य 20 लाख लोगों को रोजगार मुहैंया कराना है। यह एक्सपो 305 प्रदर्शकों के साथ एशिया का सबसे बड़ा कालीन मेला है। ग्रामीण महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए बल दिया जा रहा है। कालीन खरीददारों के लिए यह अनूंठा प्लेटफार्म है। मेले में केंद्र और राज्य सरकार के जिन प्रतिनिधियों और शख्सियतों ने भाग लिया उनमें संयुक्त सचिव पुनीत अग्रवाल, व्यापार सलाकार अदितिदास, आर्थिक सलाकार और टेक्सटाइल्स मंत्रालय से बबनी लाल के अलावा मिर्जापुर के मंडलायुक्त रंजन कुमार के अलावा दूसरी नामचीन हस्तियां मौजूद थीं।

रिपोर्ट- पी.एन. शुक्ल
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