डालडा और रिफाइण्ड में हो रहा है खेल रोकने के जिम्मेदार अधिकारी कर रहे है भारी कमाई

0
95

मैनपुरी– धन लिपसा की हवस ने इन्सान को इतना अंधा बना दिया है कि चंद सिक्कों की खातिर लोग जीवन से खिलवाड़ करने में नहीं चूक रहे है और इस व्यवस्था पर नकेल डालने के लिये बनाया गया विभाग इन्सानी जीवन की परवाह न करते हुये अवैध वसूली में मस्त है। मिलावट का जहर इतनी तेजी से व्यापार में शामिल हुआ है कि खाने पीने की वस्तुये तो इसकी चपेट में है ही जीवन रक्षक दवायें और देवता रूपी इंसान कहे जाने वाले चिकित्सक भी इस मिलावट खोरी से नहीं बच पा रहे है।

मिलावट का जहर इंसानियत के लिए एक बदनुमा दाग है। ये जानने के बाद भी समाज के लिये जिम्मेदारी का ठीकरा फोडने वालें लोग सब कुछ जानते हुये भी अंजान बने है। खाने के तेल, बेसन, दालें, खोया, पनीर यहां तक कि जीवन रक्षक दवायें तक नकली है। डाल्डा और रिफाइण्ड की बात की जाये तो फार्चून रिफाइण्ड 90 रूपये और रिफाइण्ड गोल्ड 70 रूपये, राग वनिस्पति 77 रूपये और राग गोल्उ 55 रूपये में मिल जाता है। गोल्ड को लोग भले की उच्च क्वालिटी का मानते हो पर वास्तविकता यह है कि गोल्ड ब्राण्ड ही कम्पनी द्वारा बेचा जाने वाला घटिया पामोलीन है । जिसे विदेषों में जानवर नहीं खाते पर हिन्दुस्तान में हर कचौड़ी, समौसे बाले ठेले पर यही पामोलीन खुले आम गलाया जा रहा हैं । जिससे पेट की गम्भीर बीमरियां अल्सर, पेप्टिक अल्सर, किडनी, आंतों में घाव, कलेजे में जलन की षिकायते मिल रही हैं।

खून में कोलस्टोल की मात्रा भी घातक बीमारियों में मानी जाती है। इसके अलावा बाजार में बिकने वाले देषी चने अथवा ब्राण्डेड कम्पनियों के बेसन की बजाये चटरी कसाड़ा जैसे दानों को पीसकर सस्ता बेसन बनाया जा रहा है। कुछ घाग लोग एक किलो दूध में पाउडर और रिफाइण्ड डालकर सस्ता खोया, पनीर तैयार कर बाजार में खुले आम बेच रहे है।
इनरबाॅक्स जिम्मेदार अधिकारी हर माह पहुचते है झोला लेकर मिलावट खोरी को रोकने का जिम्मा रखने वाला विभाग जिलाधिकारी के अधीन विकास भवन में कार्यरत है परन्तु फूड एडलट्रेषन एक्ट के नाम पर भारी बसूली करने वाले अधिकारी और कर्मचारी हर महीने अपनी बधी हुयी दुकानों पर झोला लेकर पहुच जाते है। और इस मिलावट खोरी में सहभागिता करते हुये अपने लिये षुद्ध माल ले जाते है।

आंटे से बूंदी और ग्लूकोज बन रही है मिठाईयां लम्बे समय से इस जनपद में मिलावट खोरी रोकने के लिये प्रषासन और विभाग द्वारा कोई ठोस कदम और छापेमारी नहीं की गयी। और जिनका सेम्पल भरा भी गया वह ले देकर यही नश्ट कर दिया गया। षहर में मैदा आटा से बूदी और चीनी की बजाये तरल ग्लूकोज से खुलेआम मिठाईयां बनती और बिकती है पर अंधे को हाथी की पूंछ ही दिखाई पड़ती है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here