हरपालपुर ब्लाक प्रमुख के लिए तख्ताप लट की तैयारियां तेज

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हरपालपुर/हरदोई (ब्यूरो)- “हरपालपुर ब्लाक प्रमुखी के लिए तैयारियां जोर शोर से चल रही है तथा प्रदेश की सत्ता का निजाम बदलते ही जनपद में कुर्सियों पर कब्जे की जंग के आसार के बनते स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं और सत्ता की ताकत के बदौलत ब्लाक प्रमुखी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कब्जे की जंग का पहला अखाड़ा बनने के लिए तैयार है |

जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित हरपालपुर ब्लाक के बारे में बतातें चलें कि 2017 के विधानसभा चुनावों से पूर्व तत्कालीन समाजवादी सरकार के समय सपा मुखिया के करीबी विश्राम सिंह यादव के पूर्व जिलाध्यक्ष पुत्र के समर्थन से वर्तमान में हरपालपुर की प्रमुखी की कुर्सी संभाल रहे अशोक कठेरिया ने सतौथा से क्षेत्र पंचायत सदस्य भाजपा सांसद अंशुल वर्मा के भाई अजीत वर्मा को शिकस्त देकर ब्लाक प्रमुखी पर कब्जा जमाया था जिसके बाद सांसद खेमें के मैनेजमेंट को लेकर जनपद में पार्टी की काफी किरकिरी भी हुई थी लेकिन सत्ता का निजाम बदलते ही सांसद खेमे की उम्मीदें एक बार फिर परवान चढ़ी है और सांसद खेमे ने प्रमुखी पर कब्जे को लेकर अपनी राजनैतिक बिसात सजाकर गोटियां बिछानी शुरू कर दी है |

प्रमुखी पर कब्जे की सुगबुहाट का आलम बीतें दिनों ब्लाक पर आयोजित एक बैठक के दौरान देखने को मिला | जंहा पर सांसद की मौजूदगी में उनके खेमे और पूर्व सपा जिलाध्यक्ष पद्मराग सिंह उर्फ पम्मू यादव के खेमे से वर्तमान प्रमुख की ओर से हंगामे के पूरे आसार बनते नजर आए | लेकिन हरपालपुर में सर्राफा व्यापारी के मर्डर की वजह से दोनों गुटों ने शांति बनाए रखी |

यहाँ पर यह जानना भी जरुरी हो जाता है कि पिछली मर्तबा करीबी मुकाबले में शिकस्त खाए सांसद के भाई अजीत वर्मा अविश्वास प्रस्ताव लाने से पूर्व अपने जीत के कील कांटे पूरी तरह से दुरुस्त कर लेना चाहते है ताकि प्रमुखी की राह ने किसी प्रकार की कोई अड़चन ना आने पाए और भाजपा सांसद के करीबी सूत्र की मानें तो इस बार संख्याबल के हिसाब से अजीत वर्मा 66 बीडीसी सदस्यों के बलबूते ताकतवर बनकर उभरते दिखाई दे रहे है |

सांसद खेमे और पम्मू यादव के बीच चल रही प्रमुखी की कुर्सी की इस अप्रत्यक्ष जंग में जीत का सेहरा किसके सर बंधेगा यह तो समय ही तय करेगा लेकिन इससे एक बात टी स्पष्ट हो जाती है कि चाल चरित्र और चेहरे की बात करने वाली पार्टी भी सत्ता की बदौलत कुर्सी पाने के लिए अन्य राजनैतिक दलों के नक्शेकदम पर ही चलने को विवश है |

रिपोर्ट- बाल्मीकि वर्मा

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