छात्र संघ चुनाव न करवाए जाने पर अनुचित फैसला ले सकते है :शैलेश सिंह शैलू

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बहराइच (ब्यूरो) छात्र संघ चुनाव की तिथि जल्द घोषित न किए जाने पर छात्रनेता किसान महाविद्यालय में तालाबंदी का फैसला ले सकते हैं । किसान महाविद्यालय के छात्रनेता शैलेश सिंह शैलू ने चेतावनी दी है कि 20 अगस्त तक किसान महाविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव करवाने की घोषणा नहीं की तो छात्रनेता एवं छात्र महाविद्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी करवाने से भी गुरेज नहीं करेंगे। वे अपने निजी आवास में आयोजित छात्रनेताओं के बैठक को संबोधित कर रहे थे ।

छात्रनेता शैलू ने बताया 20 अगस्त तक प्रतिदिन लोकतांत्रिक एवं रचनात्मक ढंग आंदोलन जारी रहेगा तथा 20 अगस्त के बाद महाविद्यालय में तालाबंदी कर महाविद्यालय बन्द कर दिया जायेगा ।

उन्होंने छात्रों से अपील की, कि वे स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुंचें, इस दिन महाविद्यालय में प्रबंधन समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहेंगे जिससे उनको अपनी मांगो से अवगत करवाया जा सकता है ।

छात्रनेता शैलेश सिंह शैलू ने उपस्थित छात्रों को बताया कि पिछले वषो में भी अवध विश्विद्यालय से सम्बद्ध साकेत महाविद्यालय फैज़ाबाद ने लिंगदोह कमेटी की गाइडलाइन के अनुसार छात्र संघ चुनाव करवाए हैं, उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट, प्रदेश सरकार तथा विश्विद्यालय ने लिंगदोह कमेटी द्वारा निर्धारित गाइडलाइन पर मुहर लगा दी है तो फिर महाविद्यालय चुनाव करवाने से क्यों कतरा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव से ही देश को राजनैतिक नेतृत्व मिलता है, लेकिन महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के नेतृत्व को उभरने नहीं दे रही। छात्रनेता शैलेश सिंह शैलू ने उपस्थित लोगों को लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों तथा छात्रसंघ चुनाव के फायदे बातये ।

क्या है लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियां
– छात्रसंघ चुनावों से राजनीतिक दल पूरी तरह दूर रहेंगे ।
– चुनाव में किसी प्रकार के प्रिंटेड मैटर का प्रयोग नहीं होगा, प्रिंटेड पंपलेट, पोस्टर, बैनर आदि का प्रयोग नहीं होगा ।
– छात्रसंघ चुनाव में हाथ से लिखे पोस्टर, पंपलेट का ही प्रयोग हो सकेेगा ।
– पांच हजार से अधिक रुपये कोई प्रत्याशी खर्च नहीं करेगा ।
– आयु सीमा भी चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित होगी। स्नातक करने वालों की उम्र 17 से कम और 22 वर्ष से अधिक न हो । वहीं परास्नातक करने वालों की उम्र 25 वर्ष से अधिक न हो ।
– रिसर्च करने वाले छात्र या छात्रा की उम्र अधिकतम 28 वर्ष हो
– चुनाव प्रचार दस दिन से अधिक न हो ।
– चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की उपस्थिति क्लास में 75 प्रतिशत से कम न हो ।
– एक बार चुनाव लड़ने के बाद चाहे उसे जीत मिले या हार दुबारा नहीं लड़ेगा ।
– चुनाव प्रचार में किसी प्रकार के वाहन, जानवर एवं लाउडस्पीकर का प्रयोग वर्जित होगा ।
– सत्र प्रारंभ होने के 6 से 8 हफ्तों के भीतर चुनाव कराया जाएगा ।
– चुनाव प्रचार कैंपस के बाहर नहीं होगा ।
– प्रचार के लिए पठन-पाठन में बाधा नहीं पहुंचाई जाए ।

छात्रनेता शैलेश सिंह शैलू ने बताया छात्रसंघ चुनावों में धनबल, बाहुबल और अपराध के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए करीब ग्यारह वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह की अध्यक्षता वाली एक कमेटी का गठन किया था। लिंगदोह कमेटी ने 22 सितंबर 2006 को अपनी सिफारिशों को कोर्ट को सुपुर्द किया जिसे तत्काल स्वीकार कर लिया गया। 28 नवम्बर 2006 को यूजीसी ने इसी रिपोर्ट के आधार पर सर्कुलर जारी कर दिया गया। रिपोर्ट में जेएनयू के छात्रसंघ चुनावों का भी हवाला देते हुए उसे सराहा गया था ।

उन्होंने बताया सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का भी आदेश दिया है। छात्रसंघ चुनाव में अगर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को वाकई कड़ाई से पालन करा दिया जाए तो छात्रसंघ के गठन के उद्देश्यों की प्राप्ति तो होगी ही साथ में राजनीति की इस नर्सरी से एक अच्छी पौध इस समाज को मिल सकेगी ।

रिपोर्ट – राकेश मौर्या बहराइच

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