घर के आंगन की हरियाली, बेटी करतीं जग उजियाली

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मैनपुरी(ब्यूरो)- इस चराचर जगत में ईश्वर ने मनुष्य को बेटी के रूप में एक ऐसा अमूल्य रत्न सौंपा है, जो दो परिवारों को गौरवान्वित करती है। बेटी घर की शान होती है। इस तरह के हृदय के उद्गार शहर की संस्था सुदिती ग्लोबल एकेडमी, मैनपुरी के वरिष्ठ प्रधानाचार्य डा. राम मोहन ने ’’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ अभियान के अन्तर्गत व्यक्त किए।

विद्यालय के वरिष्ठ प्रधानाचार्य महोदय ने ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ के सतत अभियान के अन्तर्गत बेटियों की शिक्षा तथा उनके स्वर्णिम भविष्य हेतु गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी विद्यालय में प्रवेश लेने वाली समस्त बालिकाओं के प्रवेश शुल्क में रु. 2000/- की छूट देने की घोषणा की, जिससे कोई भी बेटी शुल्क के अभाव में शिक्षा पाने से वंचित न रहे।

वरिष्ठ प्रधानाचार्य डा. राम मोहन ने आगे बताया कि बेटियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त करें तथा उनके अभिभावकों को किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए भी सरकार के द्वारा चलाई गई अनेकानेक योजनाओं को विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाली समस्त बेटियों के अभिभावकों को जागरुक करना उनका एक संकल्प है।

इसी श्रंखला में विद्यालय में ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ अभियान के अन्तर्गत एक निबन्ध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रकट करते हुए लिखा कि आज हमारे समाज में बेटियों के प्रति उदासीनता दिखायी देती है, जिसके परिणाम हमारे भविष्य के लिए अनुकूल नहीं हैं क्योंकि बेटियों के बिना यह संसार उसी तरह से सूना हो जाएगा| जिस तरह से एक निरक्षर व्यक्ति के लिए अच्छी से अच्छी पुस्तक भी उपयोग रहित होती है। प्रतियोगिता में दसवीं कक्षा की हिमाल्या शाक्य ने प्रथम, आश्वी बैस ने द्वितीय एवं मोहिनी यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए विद्यालय के वरिष्ठ प्रधानाचार्य डा. राम मोहन ने कहा कि आधुनिक युग में बेटियाँ किसी भी तरह से कम नहीं हैं। बस आवश्यकता है कि उनके अन्दर उचित तरीके से हौसलाफजाई करने की एवं उन्हें सही मार्गदर्शन की| जिसमें माता पिता के साथ-साथ विद्यालय की भी एक अहम भूमिका रहती है।

उन्होंने आगे कहा कि हमारा इतिहास इस बात का साक्षी है जब भी समाज पर कोई संकट आया है तो उसको बेटियों ने ही दूर किया है, चाहें वो माँ दुर्गा का रूप हों या अनाथों को गले लगाने वाली मदर टेरेसा हों। विज्ञान के क्षेत्र में भी बेटियाँ किसी से पीछे नहीं हैं। कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स इसके सजीव उदाहरण हैं। शिक्षा ही एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से ही बेटियाँ समाज में अपना एक समुचित स्थान व आदर प्राप्त कर सकती हैं, इसलिए प्रत्येक बेटी को उचित शिक्षा प्राप्त हो। जिससे वह दिनों दिन समाज की उन्नति करने में समर्थ बन सकती हैं।

विद्यालय की प्रशासनिक प्रधानाचार्य डा. कुसुम मोहन ने कन्याओं की महत्ता के बारे में बताते हुए कहा कि आज विज्ञान, कला, वाणिज्य, अन्तरिक्ष व अन्य क्षेत्रों में भी बेटियाँ आगे हैं। प्रवेश शुल्क में दी गई छूट बेटियों की शिक्षा के लिए एक वरदान की तरह सिद्ध होगी जिसके फलस्वरूप हमारे विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने में कोई भी बेटी अपने आप को असहाय नहीं समझेगी। विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक लव मोहन ने कहा कि जिस समाज में बेटियाँ शिक्षित होती हैं, वह समाज ही सर्वांगीण रूप से विकसित होता है क्योंकि बेटियाँ अपने साथ-साथ दूसरों को भी शिक्षित करने में आगे रहती हैं। जिस परिवार में बेटियाँ निरक्षर रह जाती हैं, वहाँ एक तरह से अंधेरा सा छाया रहता है। हम सभी का यह एक दायित्व है कि बेटियों को बेटों के बराबर ही समझें एवं उनकी शिक्षा दीक्षा में किसी भी तरह की कमी न रहने दें। हमारा सुदिती परिवार सदैव से ही बेटियों के हितार्थ अनेक योजनाएं क्रियान्वित करता आ रहा है और आगे भी करता रहेगा, जिससे हमारे देश की बेटियाँ कभी भी किसी से पीछे न रहें, हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर होकर देश को ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व को एक नवीन राह दिखाते हुए सितारों की भाँति चमकती रहें।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक लव मोहन, उप प्रधानाचार्य जय शंकर तिवारी एवं कैम्पस कोआॅर्डीनेटर अल्का दुबे सहित विद्यालय के समस्त अध्यापक-अध्यापिकाएं उपस्थित रहे।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा

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