नॅशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पर भी मोदी सरकार ने कसा शिकंजा, FIR दर्ज, जा सकते है जेल

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चंडीगढ़- देश के बहु चर्चित नेशनल हेराल्ड केस में अब कांग्रेस के हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के ऊपर भी मोदी सरकार ने शिकंजा कस दिया है | मोदी सरकार अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस को हर तरफ घेरने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है | आज हरियाणा के सतर्कता ब्यूरो ने हरियाणा के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है | गौरतलब है कि हरियाणा में इस बार भाजपा की सरकार है | भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के ऊपर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2005 में नियमों की अनदेखी करते हुए सभी नियमों को ताख पर रखते हुए पंचकूला में नेशनल हेराल्ड कंपनी एसोसियेट जर्नल (एजेएल) को 33600 स्कायर फिट जमीन आवंटित कर दी थी |

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की शिकायत पर दर्ज हुआ है मामला –
बता दें कि सतर्कता विभाग ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की तरफ से की गयी शिकायत पर यह मामला दर्ज किया है | जिस समय इस भूमि का आवंटन किया गया था उस समय हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ही इसके चेयरमैन थे | यही कारण है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है | यह भी बता दें कि इस मामले में न केवल भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के ही खिलाफ अपितु डिपार्टमेंट के ही दो अधिकारियों समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है |

क्या था पूरा मामला –
बता दें कि पंचकूला स्थित जिस प्लाट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया है उसे वर्ष 1982 में ही नॅशनल हेराल्ड की कंपनी एजेएल को दे दिया गया था और इसमें साथ ही यह भी कहा गया था कि कंपनी को 6 महीने के भीतर इस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करना था और 2 साल के भीतर इस जमीन पर निर्माण कार्य को पूरा करना था | लेकिन एजेएल ने 10 साल बीत जाने पर भी इस जमीन पर किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जिसके बाद वर्ष 1992 में तत्कालीन हरियाणा विकास पार्टी ने इस जमीन को सरकार के पास वापस ले लिया | इतना ही नहीं तत्कालीन सरकार ने एजेएल के द्वारा जमा की गयी राशि में केवल 10% की कटौती करने के बाद पूरी की पूरी धनराशि एजेएल को वापस कर दी थी |

उसके बाद वर्ष 2005 में जब हरियाणा में कांग्रेस एक बार फिर से सत्ता में आई तो तत्कालीन हुडा के चेयरमैन राज्यके तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने एजेएल को पुनः वापस करने की योजना बना ली | जिसके बाद उन्होंने हुडा के मुख्यप्रशासक को एजेएल को जमीन वापस आवंटित करने के लिए संभवना तलाश करने के लिए कहा लेकिन मुख्य प्रशासक ने साफ़ इनकार करते हुए कहा था कि अब किसी भी कीमत पर एजेएल को यहजमीन वापस नहीं दी जा सकती है | लेकिन हुड्डा ने सभी नियमों को ताख पर रखते हुए नॅशनल हेराल्ड के नाम से वर्ष 1982 में आवंटित भूमि को उसी कीमत पर पुनः आवंटित कर दी जिससे राज्य सरकार को तकरीबन 68 लाख रूपये का नुकसान उठाना पड़ा |

जानें क्या है नेशनल हेराल्ड मामला –
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि सोनिया और राहुल ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की 5,000 करोड की संपत्ति जब्त कर ली। पहले नेशनल हेराल्ड की कंपनी एेसोसिएट जनरल लिमिटेड AJL को कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है। इसके बाद के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को AJL के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडियन को मुफ्त में स्वामित्व मिल गया। स्वामी ने इस 90 करोड़ रुपये के प्रकरण में हवाला कारोबार का शक जताया है। स्वामी का यह भी आरोप है कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 1,600 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। उनका आरोप है कि साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है। हेराल्ड हाउस को फिलहाल पासपोर्ट ऑफिस के लिए किराये पर दिया गया है। स्वामी का कहना है कि हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाजा से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

नेशनल हेराल्‍ड मामले में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को दिल्‍ली हाईकोर्ट से झटका मिला है। हाईकोर्ट ने दोनों नेताओं को इस केस में पेशी से छूट देने से इंकार कर दिया है। अब दोनों नेताओं को कल मामले की सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होना होगा। कोर्ट ने दोनों नेताओं को पेश होने के लिए समन जारी किए थे।

26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश जारी किए थे। बाद में अपील करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी। चार दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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