जब वह अपने घर की छत की मरम्मत नहीं करा सका तो उसने एक टाइल बनाने वाली मशीन का आविष्कार कर डाला

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Sukhrajan

उत्तराँचल के सुखराजन जब अपने घर की छत की मरम्मत करा पाने के पैसे नही जुटा पायें तो उन्होंने पैर से चलने वाली एक टाइल्स बनाने की मशीन बना डाली |

पहली नज़र में देखने पर तो सुखराजन उत्तरांचल के आम किसान से ज्यादा कुछ नहीं लगते लेकिन उधम सिंह नगर के 32 वर्ष के इस किसान ने पैर से चलने वाली टाइल्स बनाने की मशीन का आविष्कार किया है |

आमतौर पर टाइल्स हाँथ से बनाई जाती है यह एक अधिक समय में कम परिणाम देने वाली प्रक्रिया है पर छोटे मिस्त्रीयों के पास कोई दूसरा तरीका नही था, क्योकि वे महंगी टाइल मशीने नहीं खरीद सकते |

सुखराजन की पैडल से चलने वाली मशीन यांत्रिक उर्जा को पैडल के माध्यम से कम्पन्न में बदलकर टाइल बनाने में प्रयुक्त होने वाले लकड़ी के आधार में कम्पन्न उत्पन्न करने के सिधांत पर काम करती है |

पहले तो सुखराजन ने हाँथ से ही टाइल्स बनाने की कोशिश की पर अपर्याप्त और अनियमित रेहू के कारण टाइल्स पर्याप्त मजबूत नहीं थी फिर एक दिन पास के एक कस्बे में उन्होंने देखा कि लोग रोड और पुल बनाते समय किसी ठन्डे मिश्रण का उपयोग कर रहे थे उन्होंने पाया कि एक यंत्र (Agitator) सभी तरह के सीमेंट के मिश्रण बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है तो उन्होंने Agitator की तकनीकी को टाइल बनाने में प्रयोग करने के बारे में सोचा

सुखराजन ने अपने पिता से सलाह की और एक Agitation टेबल बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत की उन्होंने Agitation टेबल बनाने के लिए एक पुराने टायर और दो पतली चादियों का इस्तेमाल किया |

इस अविष्कार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था टाइल्स बनाने वाले फ्रेम का डिजाईन, इसको निर्धारित करने में उन्हें 15-20 दिन लगे |

यह यंत्र एक एर्गोनोमिक डिजाईन (परिस्थिति के अनुसार बदलने वाला) पर आधारित पैर से चलने वाली टाइल मशीन थी, यह मशीन यांत्रिक कम्पन सिद्धांत पर आधारित टाइल बनाने वाली मशीन है, टाइल्स सीमेंट और रेत के मिश्रण से बनती है और छत, इमारत और फर्श बनाने जैसे कामों में प्रयोग की जा सकती है |

Tile Mashine

इस मशीन के बनने के बाद सुखराजन एक मिनट में एक टाइल बना सकते हैं और अब यह संभव है की एक दिन में 300 अलग – अलग डिजाईन की टाइल बनाई जा सकें इस टाइल को बनाने में कुल लागत करीब 3 रुपए की है जबकि परम्परागत टाइल बनाने में एक टाइल में करीब 6 रुपए की लागत आती है | और ये टाइल्स उन परम्परागत टाइल्स की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं |

वर्तमान समय में मशीन की कीमत करीब 7500/- रुपए है और इसे चलाने या इससे बनने वाली टाइल्स को पकाने के लिए बिजली की आवश्यकता भी नही है | यह मशीन आसानी से मिलने वाली चीजों से बनती है और इसकी देखरेख और मरम्मत का खर्च ना के बराबर है | यह मशीन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का एक अहम साधन बन सकती है |

2005 में सुखराजन को उनके आविष्कार के लिए NIF-INDIA द्वारा सम्मनित भी किया गया था |

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Photo & Story – The Better India

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