हिमाचल के सीएम ने की पहाड़ी राज्यों को ग्रीन बोनस देने की वकालत

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virbhadra singh

देहरादून (ब्यूरो)- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में आए भूकंप को गंभीरता से न लेकर उसका मजाक बनाया। उन्होंने हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों को ग्रीन बोनस देने की भी वकालत की।

शुक्रवार को देहरादून में पत्रकारों से वार्ता करते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं । भूकंप को गंभीरता से लेने के बजाए उन्होंने इसका मजाक बनाया। भाजपा कांग्रेस से डरी हुई है इसलिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत उत्तराखंड के चुनाव में झोंक दी है। प्रदर्शन के लिए भाजपा सत्ता का दुरुप्रयोग कर रही है। भाजपा चुनाव परिधि से बाहर है और आरोप लगाना उसकी आदत बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लोकसभा और राज्यसभा में भाषण देते हैं वो प्रधानमंत्री पद की गरिमा के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन हम प्रधानमंत्री पद का सम्मान करते हैं, उन्हें अभद्र भाषा की जगह तीखी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल की समस्याएं एक है और समाधान भी एक ही है। जिस तरह से हिमाचल विकास की ओर बढ़ रहा है। कांग्रेस अगर सरकार बनाती है तो उत्तराखंड भी विकास की ओर अग्रसर होगा। वीर भद्र ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा था। केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें सीएम बनाकर हिमाचल भेजा। उसके बाद मैंने एक बड़ी लड़ाई लड़ी, जिसका काफी विरोध भी हुआ। सेब की पैकिंग के लिए लकड़ी का इस्तेमाल होता था, जिसके लिए 95 हजार पेड़ कानूनी रूप से हर साल कटे जाते थे। राज्य सरकार ने पेड़ो के कटान पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसका बहुत विरोध भी हुआ। आज वनों के कटान पर सख्त प्रतिबंद है, जिससे आज हिमाचल की हरियाली लौट आई है|

लेकिन इससे प्रदेश को होने वाली आय का नुकसान हुआ है। वनों को इसलिए बढ़ाया जा रहा है कि जिससे मैदानी इलाकों को बाढ़ से बचाया जा सके। इसके बदले हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों को ग्रीन बोनस मिलना ही चाहिए। केंद्र सरकार ने प्लानिंग कमीशन को समाप्त कर नीति आयोग बना दिया। जो ठीक से अपना काम नहीं कर पा रहा है और राज्यों को मिलने वाले पैकेज का भारी नुकसान हो रहा है। वीर भद्र ने कहा के नोट बंदी केंद्र सरकार का जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला था। कालेधन का विरोध हम भी करते हैं लेकिन जिस तरह से जल्दबाजी में किसी तानाशाही तरीके से बिना किसी तैयारी के यह किया गया वह गलत है।

रिपोर्ट- मोहम्मद शादाब

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