मनायी गयी विभिन्न भाषाओँ के मर्मज्ञ डाॅ. रामसेवक विकल की जयंती

बलिया(ब्यूरो)- 1 जुलाई 2017 को प्रख्यात साहित्यकार हिन्दी, भोजपुरी, अंग्रेजी, बंगला भाषा के मर्मज्ञ डाॅ. रामसेवक विकल की जयंती डाॅ. रामसेवक विकल पुस्तकालय इसारी सलेमपुर बलिया के कार्यालय में मनायी गयी। इस अवसर पर क्षेत्र के साहित्यकार प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।कार्यक्रम की अध्यक्षता राम अवतार यादव ने किया तथा संचालन युवा रचनाकार आनंद कुमार ने किया ।

सर्वप्रथम डाॅ. विकल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपने भावोद्गार व्यक्त करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। डाॅ. संतोष कुमार शशि ने कहा कि विकल जी की कर्मभूमि जमशेदपुर रही है परंतु उनका मार्गदर्शन हम सभी को प्रायः मिलता था। अशोक कुमार यादव ने कहा कि उनके द्वारा लिखी हुई भोजपुरी गीता भोजपुरी साहित्य की अमूल्य निधि है। उक्त पुस्तक की भूमिका आचार्य विनोबा भावे ने लिखी है। राजेश यादव ने कहा कि हमें उनके द्वारा बताए हुए रास्ते पर चलने की जरूरत है।

शेषनाथ विद्यार्थी ने कहा कि उनके गीतों मे कही भी अश्लीलता नहीं है। सुनील शर्मा ने कहा कि आज वे हमारे बीच नहीं हैं परन्तु उनका साहित्य उनकी उपस्थिति का आभास कराता है। डाॅ. आदित्य कुमार अंशु ने कहा कि हिन्दी , अंग्रेजी, बंगला, भोजपुरी की अनेक पुस्तकें प्रकाशित है ।उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आरा विश्वविद्यालय द्वारा लघु शोध किया गया है। उनकी कई दर्जन पुस्तक अप्रकाशित संग्रहणीय है इस गोष्ठी में पंकज श्रीवास्तव, रोमित हिमकर, आनंद कुमार, संतोष गुप्ता, अशोक यादव, राजेश यादव, शेषनाथ विद्यार्थी, सुनील शर्मा, खुर्शीद आलम, आशुतोष तिवारी, शिवरंजन सिंह, रामअवतार यादव, आदि लोग उपस्थित थे । आये हुए लोगो के प्रति डाॅ आदित्य कुमार अंशु ने आभार व्यक्त किया ।

 

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