आखिर हिन्दुओं में सर पर शिखा (चोटी) रखना क्यों था अनिवार्य ? जानें

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http://shop2gether.sg/priority/mozhno-li-vilechit-rak-legkogo-1-stadii.html можно ли вылечить рак легкого 1 стадии chotiभारतवर्ष दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक जहाँ पर कहा जाता हैं कि सबसे पहले मानव सभ्यता ने ज्ञान और विज्ञान के चरम को छुआ I इस देश को विविध धर्मों का भी देश कहा जाता हैं लेकिन इस देश की सबसे पुरानी सभ्यता हिन्दू सभ्यता हैं और यहाँ पर रहने वाले सबसे अधिक लोग हिन्दू धर्म के मानने वाले भी है I आपने अक्सर देखा होगा और सुना भी होगा कि हिन्दू धर्म के लोग ज्यादातर अपने सर पर चोटी रखते हैं और आप यह भी जानते ही होंगे की चोटी को शिखा भी कहा जाता हैं I अक्सर हम देखते हैं कि हमारे ऋषि मुनि सभी चोटी रखते थे आज भी ऐसा है लेकिन आधुनिकता के इस दौर में लोग इसे भले ही भूल रहे हैं लेकिन फिर आज भी हम हिन्दुओं में इस प्रथा को देख सकते है I शिखा रखने की यह परंपरा कोई धार्मिक परंपरा हो न हो यह तो मैं नहीं कह सकता लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूँ कि इसका वैज्ञानिक कारण अवश्य हैं I और इस बात को आधुनिक काल के कई वैज्ञानिकों ने साबित भी किया है I आइये जानते हैं कि आखिर क्या हैं सर पर शिखा रखने के वैज्ञानिक कारण –

сводка дтп курган 1. सर पर शिखा रखने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण यह है कि जहाँ पर सर के उपरी हिस्से जिसे शिखा वाला भाग के तौर पर जाना जाता हैं , उसके नीचे सुषुम्ना नाड़ी होती है, कपाल तन्त्र के अन्य खुली जगहोँ(मुण्डन के समय यह स्थिति उत्पन्न होती है)की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होता है। जिसके खुली होने के कारण वातावरण से उष्मा व अन्यब्रह्माण्डिय विद्युत-चुम्बकी य तरंगोँ का मस्तिष्क से आदान प्रदान बड़ी ही सरलता से हो जाता है। और इस प्रकार शिखा न होने की स्थिति मेँ स्थानीय वातावरण के साथ साथ मस्तिष्क का ताप भी बदलता रहता है। लेकिन वैज्ञानिकतः मस्तिष्क को सुचारु, सर्वाधिक क्रियाशिल और यथोचित उपयोग के लिए इसके ताप को नियंन्त्रित रहना अनिवार्य होता है। जो शिखा न होने की स्थिति मेँ एकदम असम्भव है। क्योँकि शिखा(लगभग गोखुर के बराबर) इसताप को आसानी से सन्तुलित कर जाती है और उष्मा की कुचालकता की स्थिति उत्पन्न करके वायुमण्डल से उष्मा के स्वतः आदान प्रदान को रोक देती है। आज से कई हजार वर्ष पूर्व हमारे पूर्वज इन सब वैज्ञानिक कारणोँ से भलिभाँति परिचित है।

укажите свойства характерные для большинства высших растений 2. सर के जिस स्थान पर शिखा (चोटी) रखी जाती है यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित करने का स्थान होता है। शिखा को हम हिन्दुओं का एक धार्मिक प्रतीक मान सकते हैं लेकिन साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मस्तिष्क को संतुलन में रखने के पीछे भी इसका बहुत बड़ा हाथ होता है I

http://essentialtoronto.com/owner/ponyatie-sili-zakoni-nyutona.html понятие силы законы ньютона 3. आधुनकि दौर में अब लोग सिर पर प्रतीकात्मक रूप से छोटी सी चोटी रख लेते हैं लेकिन इसका वास्तविक रूप यह नहीं है। वास्तव में शिखा का आकार गाय के पैर के खुर के बराबर होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे सिर में बीचों बीच सहस्राह चक्र होता है। शरीर में पांच चक्र होते हैं,मूलाधार चक्र जो रीढ़ के नीचले हिस्सेमें होता है और आखिरी है सहस्राह चक्रजो सिर पर होता है। इसका आकार गाय के खुर के बराबर ही माना गया है। शिखा रखने से इस सहस्राह चक्र का जागृत करने और शरीर, बुद्धि व मन पर नियंत्रणकरने में सहायता मिलती है। शिखा का हल्का दबावहोने से रक्त प्रवाह भी तेजरहता है और मस्तिष्क को इसका लाभ मिलता है।

http://samobranka64.ru/library/yandeks-karti-4pda-android-skachat.html 4pda android 4. ऐसा भी है कि मृत्यु के समय आत्मा शरीर के द्वारों से बाहर निकलती है (मानव शरीर में नौ द्वार बताये गए है दो आँखे, दो कान, दो नासिका छिद्र, दो नीचे के द्वार, एक मुह )और दसवा द्वार यही शिखा या सहस्राह चक्र जो सिर में होता है , कहते है यदि प्राण इस चक्र से निकलते है तो साधक की मुक्ति निश्चत है.और सिर पर शिखा होने के कारणप्राण बड़ी आसानी से निकल जाते है. और मृत्यु हो जाने के बाद भी शरीर में कुछ अवयव ऐसेहोते है जो आसानी से नहींनिकलते, इसलिए जब व्यक्ति को मरने पर जलाया जाता है तो सिर अपनेआप फटता है और वह अवयव बाहर निकलता है यदि सिर पर शिखा होती है तो उस अवयव को निकलने की जगह मिल जाती है.

http://carloschreiber.com/owner/htc-desire-c-harakteristiki.html htc desire c характеристики 5. शिखा रखने से मनुष्य प्राणायाम, अष्टांगयोग आदि यौगिक क्रियाओं को ठीक-ठीक कर सकता है।  शिखा रखने से मनुष्य की नेत्रज्योति सुरक्षित रहती है। शिखा रखने से मनुष्य स्वस्थ, बलिष्ठ, तेजस्वी और दीर्घायुहोता है।

музей под небом  

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