भारत-बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक ‘भूमि सीमा समझौते’ से हज़ारों की जिंदगी खुशहाल

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फोटो सोर्स - THE HINDI
फोटो सोर्स – THE HINDU

भारत और बांग्लादेश की सीमा पर बसे हजारों लोगों के लिए शुक्रवार की आधी रात एक नई सुबह लेकर आई। ‘भूमि सीमा समझौते’ के तहत एक अगस्त से दोनों मुल्कों के बीच बस्तियों के ऐतिहासिक आदान-प्रदान का काम शुरू हो रहा है। इसके साथ ही बांग्लादेशी गलियारे में रहने वाले 14 हजार लोगों को भारत की नागरिकता देने का काम भी शुरू हो गया। अगले 11 महीनों तक कई चरणों में बस्तियों की अदला-बदली का काम पूरा किया जाएगा। भूमि हस्तांतरण को लेकर दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अंतिम बैठक शुक्रवार को राज्य के कूचबिहार जिले में हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। अदला-बदली पर एक नजर -भारत अपने क्षेत्र के 111 एनक्लेव बांग्लादेश को सौंपे हैं। इसका क्षेत्रफल 17,160 एकड़ है। -भारत को बांग्लादेश से 51 एन्क्लेव मिले हैं जिनका क्षेत्रफल 7,110 है । यहाँ रहने वाले तकरीबन 51 हजार लोगों के पास दशकों से कोई देश नहीं था। -यहां के लोगों को अब अपनी पसंद के हिसाब से नागरिकता हासिल हो सकेगी। -भारतीय सीमा में मौजूद 51 बांग्लादेशी एनक्लेव के लोगों ने यहीं रहने का फैसला किया है जबकि बांग्लादेश स्थित भारतीय एनक्लेव के करीब 1000 लोग भारतीय सीमा में आएंगे। इन बस्तियों में रहनेवाले लोग जन सुविधाओं से वंचित थे और काफी खराब हालत में जीवन व्यतीत कर रहे थे। करार होने के बाद यहां रहनेवाले लोगों को अपना देश चुनने की आजादी दी गई। पिछले महीने दोनों देशों के अधिकारियों ने साझा अभियान चलाकर इन इलाकों में रहनेवाले एक-एक आदमी से उनकी नागरिकता के बारे में राय मांगी। उनकी इच्छा के आधार पर उन्हें भारत या बांग्लादेश में रहने की इजाजत दी गई।

भारत और बांग्लादेश के इस ऐतिहासिक ज़मीन समझौते का विरोध भी हुआ, असम की राजनैतिक पार्टी असम गण परिषद ने इस समझौते का विरोध करते हुए कल प्रदर्शन किया और कहा कि ज़मीन की अदला-बदली के इस समझौते में बीजेपी ने अपना दोहरा रवैया सामने रखा है, चुनाव से पहले बीजेपी ने कहा था कि भारत की एक इंच ज़मीन भी बांग्लादेश को नहीं देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

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