बड़ी ही हसीन और रंगभरी होती है होली, पर अब महंगा हुआ गुलाल

0
279


बीघापुर उन्नाव : आवश्यक वस्तुओं पर महंगाई की मार के चलते होली का रंग बदरंग होता जा रहा है हंसी ठिठोली गुलाल-अबीर मीठे पकवान की होली आम आदमी के लिए औपचारिकता भर बन कर रह गई है | होली के करीब होते ही जिस तरह से महंगाई का पारा बाजार में चढ़ रहा है, उसने होली की खुशियों को मायूस सा कर दिया है, वहीं खेत-खलिहानों में फसलों की कटाई मडाई के चलते भी बाजार में रौनक नहीं दिख रही है जिससे दुकानदार भी अनमने हुए हैं हालांकि नौकरीपेशा वालों के परिवारीजन बाजार में खरीद-फरोख्त के लिए पहुंचने से बाजारों में कुछ रौनक झलकने लगी है मौज-मस्ती हंसी ठिठोली की मादकता वैसे तो बसंत महीने की शुरूआत से ही छाने लगती है |

प्रेम सद्भाव तथा पारस्परिक समता का पर्व होली फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है, लगभग 1 माह पूर्व गांव के चौराहों या प्रमुख स्थानों पर होली का डंडा रखा जाता है होलिका दहन की रात्रि को होली जलाई जाती है घरों में करीब 15 दिन पूर्व से गोबर के बल्ले की माला बनाकर कई मालाएं एक के ऊपर एक आंगन में चौक पूर्ण कर उसके ऊपर रखते हैं चौराहे पर सार्वजनिक होली से कनडा की आग लाकर घर में बनाई गई होली को जलाते हैं होलिका दहन के सायं होली के हुडदंग शुरू हो जाते हैं अगले दिन ही रंग की होली खेली जाती है इस दिन गरीब अमीर के सारे भेदभाव मिट जाते हैं, दूज के दिन सुबह बहिन भाई को तिलक कर उसके मंगल जीवन की कामना करती है और भाई-बहनों को उपहार देते हैं, ऐसी मान्यता है कि होली का त्योहार होलिका दहन से जुड़ा है, जब भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद को उसका पिता हिरण्यकश्यप मारने में असफल रहा तो उसकी बहन होलिका अपने भतीजे पहलाद को मारने का प्रयत्न करती है उसे ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि वह चुनरी पहन ने पर आग से नहीं जलेगी लेकिन जब वह विष्णु भक्त प्रहलाद को मारने के लिए अपने वरदान का गलत इस्तेमाल करती है तो वह स्वयं स्वाहा हो जाती है और भक्त प्रह्लाद बच जाते हैं होली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है प्रेम समरसता के रंग को और चटक करने वाले इस त्यौहार में भंग की तरंग का मजा और ही होता है भांग का स्वाद चखते ही लड़खड़ाते कदम वातावरण को मदहोश बना देते हैं ढोल मजीरे की झंकार होली के रंग को और भी चटक बना देती है लेकिन महंगाई की मार से खोए की गुझिया का आकार सिमटता जा रहा है |

वही वह मिठास भी मिलावट खोरो की वजह से नहीं रही होली के माहौल में क्षेत्र रंगने लगा है ऐसे में बाजार रंग अबीर गुलाल पिचकारियों से पटा पड़ा है लेकिन कीमत सुनते ही ग्राहक आगे की ओर पड़ जाता है अब की बार बाजार में चाइनीज पिचकारियों की धूम मची हुई है क्योंकि वह देखने में अच्छी व सस्ती होने से लोग इनको ज्यादा खरीद रहे हैं इस बार की होली का त्यौहार और भी खास होने के आसार हैं क्योंकि विधानसभा के प्रत्याशियों की जीत हार का फैसला भी होली के एक दिन पहले आएगा अगर हर प्रत्याशी तथा उनके समर्थक जीत हार की खुशियों को भुलाकर होली के रंग में रंगे हुए आपस में गले मिलेंगे तो सामाजिक एकता बनी रहेगी होली का त्यौहार आपसी भाईचारे का त्योहार बना रहेगा |

रिपोर्ट – मनोज सिंह

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here