राजधानी से 40 किलोमीटर दूर में इस गांव ने पहली बार जाना कैसी होती है बिजली

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उत्तर प्रदेश: लखनऊ से 40 किलोमीटर दूर मोहनलालगंज इलाके के राजा खेड़ा गांव में 21 अप्रैल 2017 को आजादी के बाद पहली बार गांव वालों ने जाना बिजली क्या होती है| इस गांव में बिजली एक महीने पहले पहुंची भी तो केंद्र सरकार की पंडित दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के जरिए इन गांवों में जाने के बाद पता चला आखिर बिजली नहीं होने का दर्द क्या होता है| राजा खेड़ा गांव एक बुजुर्ग मिले, जिनकी जिंदगी बिना बिजली की गुजर गई| कहते हैं उम्र के इस पड़ाव पर आकर हमने एक महीने पहले बिजली नाम की क्या चीज होती है पहली बार देखा है| गांव में आज की तारीख में हर घर में पंखा और टीवी लग गया है| हमारी मुलाकात गांव के विनोद कुमार (30 वर्ष ) से हुई| उन्होंने न्यूज18 हिंदी से खास बातचीत में बताया कि हम लोग पीएम मोदी और सीएम योगी को दिल से बधाई देते हैं, जिन्होंने इस गांव में बिजली लाकर एक नई उर्जा देने का काम किया है|

विनोद बताते हैं कि जब इस गांव में बिजली नहीं थी तो गांव वाले रात को घर से निकलने से डरते थे| वहीं बच्चों की पढ़ाई भी काफी प्रभावित होती थी| किसी की तबीयत खराब हो जाए तो उसको अस्पताल ले जाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी| समाज सेवा के जरिए गांव में एक अलख जलाने का प्रयास करने वाले विनोद ने बताया कि पिछली सरकार की बात करें तो वे यहां लाइट नहीं पहुंचा सके, लेकिन लैपटॉप जरूर पहुंचा दिया| इस गांव में बिजली पहुंची भी तो केंद्र सरकार की विद्युत परियोजना के जरिए वो भी एक महीने पहले गांव के छात्रों ने न्यूज 18 हिंदी से बातचीत में बताया कि इस गांव में बिजली नहीं थी तब हम लोग एक किलोमीटर दूर दूसरे गांव में साइकिल से लैपटॉप चार्ज करने के लिए जाते थे| वहीं एक छात्रा सरिता का लैपटॉप भी चार्जिंग के दौरान फूंक गया| फिलहाल, अब इस गांव में बिजली 18 घंटे रह रही है| पूरे गांव में खुशी की लहर है| अब गांव वालों से लेकर बच्चे भी शाम को पंखे के नीचे पढ़ाई करते नजर आ रहे है| गांव वालों ने इस केंद्र सरकार की इस पहल के बाद अब इस गांव की तस्वीर बदली -बदली सी नजर आ रही हैं|

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना- यह योजना, विद्युत मंत्रालय के तहत नवंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस घोषणा के साथ शुरू की गयी थी कि “सरकार नें 1000 दिनों के भीतर 1 मई, 2018 तक 18,452 अविद्युतीकृत गांवों का विद्युतीकरण करने का फैसला लिया है| बजट पूरी योजना 43,033 करोड़ रुपये के निवेश की है| इसमें से पूरे कार्यान्वयन की अवधि में भारत सरकार से 33,453 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन की आवश्यकता शामिल हैं| कितनों को मिला लाभ सरकार के अनुसार इस परियोजना को मिशन मोड के आधार पर लिया गया है| विद्युतीकरण के लिए रणनीति में कार्यान्वयन सारणी को 12 महीने के समयसीमा में सीमित करना और ग्राम विद्युतीकरण प्रक्रिया को निगरानी के लिए निर्धारित समयसीमा के 12 चरणों के मील के पत्थर में विभाजित किया गया है| अप्रैल 2015 से 14 अगस्त, 2015 तक कुल 1654 गांवों को विद्युतीकृत किया गया| भारत सरकार द्वारा मिशन मोड रूप में पहल करने के बाद 15 अगस्त, 2015 से 17 अप्रैल, 2016 तक 5689 अतिरिक्त गांवों को विद्युतीकृत किया गया| प्रगति में और तेजी लाने के लिए ग्राम विद्युत अभियंता (जीवीए) के माध्यम से करीबी से निगरानी किया जा रहा है| मासिक आधार पर प्रगति की समीक्षा, योजना और निगरानी (आरपीएम) की बैठक, राज्य डिस्कॉम के साथ विद्युतीकरण के स्तर पर वाले गांवों की सूची साझा करना, ऐसे गांवों की पहचान करना जहॉ प्रगति में देरी हो रही है जैसे कदम नियमित आधार पर उठाए जा रहे हैं| इसका लाभ कैसे उठाएं इस योजना के तहत सरकार और विभाग खुद ही गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए पायलट स्‍तर पर काम कर रहे हैं|

रिपोर्ट- मिंटू शर्मा

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