कैसे चली गयी पुष्कर में स्नान करने वाले श्रधालुओं की जान, हादसा या हत्या ?

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फाइल फोटो
फाइल फोटो

आंध्रप्रदेश के प्रसिद्द राजमंड्री जिले में होने वाले प्रसिद्द पुष्कर मेले में मची भगदड़ के कारण लगभग 33 श्रधालुओं की जान चली गयी और लगभग 50 से अधिक लोग घायल हो गये I प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के हवाले से प्राप्त खबरों के अनुसार इस मेले में सबसे अधिक मरने वालों में महिलायें शामिल हैं I

आपको ज्ञात ही होगा कि यह घटना बीते मंगलवार की हैं जब गोदावरी नदी के पावन तट पर कोटगुम्मम पुष्कर घाट पर पवित्र स्नान करने के लिए लोगों को अचानक हुजूम उमड़ पड़ा था I और अनुमान से अधिक भीड़ के अचानक आ जाने के कारण यहाँ पर भगदड़ मच गयी और महिलायें, बच्चे और बूढ़े निर्दोष लोग मारे गये और तमाम लोग घायल हो गए I

इस घटना को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक ब्यक्त करते हुए ट्वीट किया था और इतना ही नहीं सूबे के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने भी इस अप्रिय घटना पर गहरा शोक ब्यक्त किया और पीड़ितों तथा घायलों को हर संभव मदद देने के निर्देश भी दे दिए I

जिसने भी सुना हर किसी ने अफ़सोस जताया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहा I घायलों और पीड़ितों के प्रति हर किसी की संवेदना सराहनीय हैं, देश के बड़े-बड़े नेता एक ही सुर में जनता के लिए राग अलापते दिखे I विपक्ष के कुछ लोगों ने इस अप्रिय घटना के लिए सूबे के मुख्यमंत्री को भी जिम्मेदार ठहरा दिया और उनसे स्तीफे की भी मांग की हैं I

 

http://mate.kz/loadnews/sitemap46.html свечи палин инструкция क्या हैं पुष्कर का त्यौहार यह त्यौहार महाकुम्भ की तरह से होता हैं, आपको ज्ञात ही होगा कि महाकुंभ हर 12 वर्षों पर होता हैं लेकिन यह महापर्व हर 144 वर्ष में एक ही बार होता हैं I यह पर्व ‘गोदावरी महापुष्कर’ के नाम से पूरे संसार में प्रसिद्द हैं I यहीं कारण हैं कि इस दिन इतने अधिक लोग गोदावरी के तट पर पहुँच गए I

 

हादसे में गयी जानें श्रधालुओं की या फिर की गयी हैं उनकी हत्या –

हर किसी की अफ़सोस जनक बातें सुनने के बाद और विपक्ष की मांगों के बाद मैंने सोचा चलिए जरा इस बात की पड़ताल करते हैं कि आखिर अक्सर हमारे ही देश में ऐसे हादसे क्यों होते हैं ? तब जो निकल करके आया उससे एक बात समझ में आती हैं कि यह हादसा तो नहीं था ! इसे क्या नाम देना हैं यह मैं आप सभी के ऊपर छोड़ता हूँ I

  • आंध्रप्रदेश की सरकार ने इस पूरे पुष्कर स्नान का आयोजन करने के लिए इसकी ब्यवस्था के लिए अनुमानित 1600 करोंड रूपये खर्च किये थे I
  • राज्य सरकार ने पवित्र गोदावरी नदी के पूर्व व पश्चिम के जिलो और राजमंड्री जिले को मिलाकर 275 घाटो पर स्नान की ब्यवस्था की थी I

आप सभी को बताते चले कि आंध्रप्रदेश सरकार इस बार होने वाले इस महापर्व को ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस महास्नान का लाभ दिलाना चाहती थी इसीलिए प्रदेश की सरकार की तरफ से पिछले 2 महीनों से टी.वी. चैनलों पर इसका जी तोड़ प्रचार किया जा रहा था I

लेकिन जब लोग पहुंचे तो उनमें से कुछ को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ गया I और सरकार के योगदान, मंसा, स्वार्थ, ब्यवस्था, खर्च, उद्देश्य सभी पर एक ही साथ पानी पड़ गया I और पोल खुल गयी सरकारों की नीतियों की I

सूत्रों के हवाले से प्राप्त खबरों के अनुसार –

आंध्रप्रदेश के सूत्रों के हवाले से प्राप्त खबरों के अनुसार सूबे की सरकार जिस महा स्नान की ब्यवस्था में रात दिन एक कर रही थी और जिस पावन स्नान के लिए उसने 275 घाटों को तैयार किया था, उसी सरकार ने अपने प्रचार अभियान में केवल और केवल चार घाटों को ही दिखाया था I अब जरा आप खुद ही सोचिये कि 275 घाटों पर स्नान करने वाली जनता जब मात्र 4 घाटों पर आएगी तो क्या होगा I

स्नान सुबह से ही प्रारंभ हो जाता तो शायद यह न होता लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने जनता से पहले खुद ही स्नान करने का मन बनाया और पहुँच गए अपने पूरे लाव-लस्कर के साथ गोदावरी के तट पर स्नान करने I अब जब सूबे के मुख्यमंत्री स्नान कर रहे थे तो उनके स्नान और पूजा के वक्त घाट को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया I परिणाम बाहर भीड़ इतना ज्यादा इक्कठा हो गयी कि जिसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता था I

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने लगातार 3 घंटे तक पूजा की और उसके बाद उस घाट को आम जनता के लिए खोला गया I घाट के खुलते ही पूरी की पूरी जनता एक साथ ही नदी की तरफ बढ़ चली और हो गयी दुर्घटना I

CM पूजा नहीं बल्कि बना रहे थे फिल्म –

सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार सूबे के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू घाट पर पूजा नहीं बल्कि इस पूरे कार्यक्रम के ऊपर एक फिल्म बनवा रहे थे I जिसके माध्यम से वह मीडिया के माध्यम से अपने द्वारा किये गए सराहनीय कार्यों की गिनती करवा सकते और अपना गुणगान करवा सकते थे I इस फिल्म के निर्देशक का नाम बोयापाटी श्रेनु बताया जा रहा हैं I लेकिन इस घटना ने उनके सभी पहले से किये प्लानों की धिज्जी उड़ा दी और उन्हें ही कठघरे में ला खड़ा कर दिया I

अब इस पार विचार करने की आवश्यकता हमें नहीं बल्कि सूबे की और देश की जनता को हैं कि क्या इसे हादसा कहा जाना चाहिए या फिर यह एक हत्या हैं ?

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