कैसे हो जल संरक्षण तालाब पर तो हो गया अवैध कब्जा

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जौनपुर(ब्यूरो)- जीवन का पर्याय कहे जाने वाले जल के प्राकृतिक श्रोत तालाब विलुप्त होते जा रहे हैं। भू-माफिया उन्हें पाटकर उनकी कब्र पर आलीशान इमारतें खड़ी कर रहे हैं।अपनी जमीनी हवस मिटाने की लालच में उनपर बदनीयती से अवैध कब्जे करने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। बात करें जल संरक्षण की तो समय-समय पर संबंधित विभाग गोष्ठी, स्लोगन, नारे आदि लगवाकर कागजी कोरम पूरा करते हुए अपने जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेते हैं। मैदानी भाग में बसे होने के बावजूद सूखे से जूझते बदलापुर तहसील के गॉव पूरारजवार की यह विडंबनात्मक त्रासदी है। यहां की भयावह तस्वीर के जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और कर्मचारी है क्योंकि तालाब के जमीन पर अवैध कब्जे की जानकारी उनको है।

उक्त गॉव में काफी अर्से से छोटे बड़े कुल छ: तालाब थे, उनमें से कुछ पट्टा कर दिया गया और कुछ पर अवैध कब्जा हो चुका है। अवैध कब्जे की भेंट चढ़ चुके इन तालाबों का अस्तित्व ही नहीं रह गया। राजस्व विभाग के दस्तावेज के अनुसार गॉव के खाता संख्या 00185 के आराजी नं० 262/0.0120, 273/0.0240, 316/0.0240, 307/0.1130, 335/0.0160, 336/0.1130 की जमीन तालाब के नाम दर्ज हैं| बड़े बुजुर्गों की माने तो इन सभी तालाबों में पूरे वर्ष पानी रहता था| जिससे जानवारों तथा पक्षियों को पीने के लिए पानी उपलब्ध रहता था, परन्तु इन तालाबों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इतना ही नहीं आ० नं० 335 व 336 तालाब की जमीन पर गॉव का ही एक व्यक्ति इस कदर अवैध कब्जा कर रिहायसी मकान बनाकर कटीली झाड़ियां लगा दिया है कि उक्त आराजी से सट कर बना दर्जनों गॉवों को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी अवरुद्ध हो गया है| जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने दो माह पूर्व ही तत्कालीन तहसीलदार महोदय बदलापुर लालता प्रसाद से किया था| जिस पर उन्होनें मौका देखकर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन तो दे दिया परन्तु आज तक कोई भी विभागीय कर्मचारी दिखायी नही पड़ा जिसके फलस्वरूप हौसला बुलंद अतिक्रमणकारी अपने मंसूबे में कामयाब होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट- डॉ. अमित कुमार  पाण्डेय
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