बाबा गोदालेश्वर के प्रसिद्द धाम पर लगता है श्रद्धालुओं का तांता

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बीघापुर उन्नाव : क्षेत्र में महाशिवरात्रि के दिन शिवालयों में शिव भक्तो की भीड़ उमड़ती है नगर पंचायत बीघापुर स्थित बाबा गोदावलेश्वर धाम अपनी पौराणिकता, ऐतिहासिकता व सैकड़ों चमत्कारिक घटनाओं का साक्षी है मंदिर की भव्यता वरबस श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है। शिवरात्रि में मेले जैसा माहौल सुरम्यता में चार चांद लगाने वाला रहता है। एक सहस्त्राब्दि से अधिक समय से जनपद ही नहीं दूर-दूर तक बाबा भोलेनाथ के भक्तो के आस्था का केन्द्र बाबा गोदावलेष्वर धाम है, भक्तो के बीच बाबा गोदावलेष्वर धाम को 12 ज्योर्तिलिगों की भंाति मान्यता प्राप्त है। दूरस्थ जनपदो से श्रद्धालु आकर बाबा के दरबार में आते हैं, बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता।

मंदिर निर्माण के बारे में बुर्जुगों का कहना है कि बौद्ध स्थापत्य कला में बना मंदिर का मुख्य स्तूप घुमन्तू जाति के बंजारो द्वारा 1087 वर्श पूर्व सम्वत् 987 में बनवाया गया मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने विषाल सरोवर है। प्रातःकाल सूर्य भगवान अपनी प्रथम किरणो से षिवलिंग की पूजा करते हैं गर्भगृह का दरवाजा लगभग ढाई फुट ही ऊंचा है फिर भी साल के 12 महीने सूर्योदय की किरणें षिवलिंग तक पहुंचती हैं गर्भगृह लगभग 10 फीट ऊंचाई पर स्थित है। मुख्य मंदिर के बगल में बारादरी व आधा दर्जन अन्य मंदिर बने हैं जिनमें षनि मंदिर, हनुमान मंदिर व द्वादष ज्योर्तिलिंग का मंदिर है। मंदिर परिसर में इमली, बरगद, पीपल के वृक्ष षोभा में चार-चांद लगा रहे हैं षिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है सुबह काले रंग, दोपहर भूरे रंग तथा षाम को हल्का नीले रंग का हो जाता है।

मंदिर के गर्भगृह में अक्सर विषालकाय काला सर्प पूजन अर्चन करने वालो को दिखाई देता है। मंदिर के बारे में हजारो चमत्कारिक घटनाएं आम जनमानस में है। नगर पंचायत के प्रयासों से मंदिर के ठीक सामने स्थित सरोवर की छठा अनुपम दर्शनीय है। शांत वातावरण बरबस ही साहित्यकारों को मंदिर में खींच लाता है और जाने-माने साहित्यकारों ने बाबा गोदावलेष्वर धाम में बैठकर साहित्य सृजन की ऊंचाईयो को छुआ है। साहित्यकार भास्कर दत्त दीक्षित, कालीदीन बाजपेयी, कंज जी, मिलिंद जी, सदाषिव, नरनाथ ने भी हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। वर्तमान में विजय पाण्डेय ‘दर्द कानपुरी’, डा. मान सिंह, रामकुमार यादव ‘कुमुदेष’ अपनी साहित्य साधना को नई ऊंचाईयां दे रहे है।

लगभग 1100 वर्शो से साहित्यिक, सामाजिक गतिविधियो का केन्द्र बाबा गोदावालेश्वर धाम बना है। सावन में भी श्रद्धालुओ की अपार भीड़ आती है, प्रत्येक सोमवार को कीर्तन तथा आखिरी सोमवार को जवाबी कीर्तन रविशंकर जनकल्याण समिति द्वारा तथा रामलीला समिति द्वारा दशहरा को चार दिवसीय रामलीला, मेला कमेटी द्वारा शिवरात्रि के अवसर पर चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है, तथा जागरण व अन्य कार्यक्रम वर्ष पर्यन्त चलते रहते है। नगरपंचायत के पूर्व स्थित बाबा गोदावलेश्वर धाम व पष्चिम में मां का सन्दोही धाम तीर्थ स्थल ही नहीं लोगो के ह्दय में अटूट श्रद्धा के केन्द्र है। विभिन्न आयोजनों की तैयारियां जोरो पर चल रही है मेला कमेटी आयोजक सुधीर बाजपेई ने लोगों से मेला में आने के लिये निवेदन किया है |

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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