बैंक में अचानक केवाईसी बंद होने से सैकड़ों खाताधारकों ने किया सड़क जाम

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सुखपुरा/बलिया(ब्यूरो)- भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय शाखा द्वारा संचालित सीएससी के अचानक बंद होने व केवाईसी नहीं होने के कारण सीएससी से जुड़े सैकड़ों खाताधारकों ने स्टेट बैंक के सम्मुख बलिया- सिकंदरपुर मार्ग को जाम कर दिया जिससे मार्ग के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई। लगभग एक घंटे के बाद थानाध्यक्ष राममूर्ति यादव व एसआई मधुसुदन चौरसिया के समझाने व शाखा प्रबंधक से बात कराने के आश्वासन पर खाताधारको ने जाम समाप्त किया। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा क्षेत्र के अपायल, हरिपुर, भरखरा, भोजपुर, शिवपुर, बेसहां मे सीएससी का संचालन होता है इसमे बैसहां सीएससी पर पिछले वर्ष लाखों रुपए के गबन के आरोप के मद्देनजर बैंक ने बैसहां सीएसी को बंद कर दिया था। शेष सीएससी पूर्व की भांति चल रही थी।

इस इस बीच बैंक के उच्चाधिकारियों ने सुखपुरा शाखा की समस्त सीएससी को बंद कर दिया जिसमें हरिपुर और भरखरा सीएससी के संचालक हाई कोर्ट से स्टे ले कर सीएससी संचालित कर रहे थे लेकिन बाद में हाईकोर्ट से पराजय के बाद उन्होंने अपनी सीएससी बंद कर दी इस प्रकार सीएससी से जुड़ें लगभग 15000 खाताधारकों का लेन-देन पूर्णतया अवरुद्ध हो गया स्टेट बैंक के मुख्य शाखा पर आने के बाद उन्हें ई केवाईसी बनाने की बात कह कर लौटा दिया जा रहा था।

बार-बार दौड़ने से परेशान और लेन-देन अवरुद्ध होने से नाराज खाता धारको ने गुरुवार को स्टेट बैंक के सम्मुख बलिया सिकंदरपुर मार्ग को जाम कर दिया। जाम की सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष और उनके सहयोगियों ने समझा-बुझाकर जाम छुड़वाया ।पता चला है कि बैंक ने सीएससी को एनजीओ को सुपुर्द कर दिया है।इससे सीएससी संचालको के कमीशन पर प्रतिकूल असर पड़ा है ।मात्र भंवरपुर सीएससी को छोड़कर सभी सीएसई आज बंद पड़ी हैं।जाम में ज्यादातर महिलाएं शरीक थी जिसमें इंदिरा,भागमति,सुंदरी,बुनेला,सरला,माधुरी व चमेली प्रमुख रुप से शामिल रही।

पेस्ट बैंक की प्रभारी शाखा प्रबंधक सुनीता तिवारी ने बताया की बैंक मे स्टाफ की बेहद कमी है जिसके चलते काम का लोड बढ़ गया है फिर भी मैने कहा है कि धीरे धीरे सबका केवाईसी बन जायेगा और तब सारी परेशानी खत्म हो जायेगी ।एक साथ इतने खाताधारकों का केवाईसी बनाना असंभव है। चित्र परिचय  1-बलिया सिकंदरपुर मार्ग को जाम करते खाताधारक। 2-पुलिस की मौजूदगी में प्रभारी शाखा प्रबंधक से बात करते खाताधारक।

रिपोर्ट- डा.विनय कुमार सिंह

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