पति की दौलत पर पत्नी के भाई का नहीं बनता कोई हक : SC

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supreeme court of india

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पति की दौलत पर पत्नी के भाई का कानूनी तौर पर कोई हक नहीं बनता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला के भाई को परिवार का हिस्सा भी नहीं कहा जा सकता। यह फैसला जस्टिस दीपक मिश्रा और आर भानुमति की एक बेंच ने दिया। आपको बता दें कि कोर्ट ने यह फैसला दुर्गा प्रसाद नाम के एक ब्यक्ति की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए दिया है| दुर्गा प्रसाद नाम के शख्स ने खुद को अपनी बहन के परिवार का हिस्सा बताते हुए देहरादून में एक प्रोपर्टी के किरायदारी का अधिकार अपने पास रखने की बात कही थी। उस पर कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि या तो दुर्गा प्रसाद चार हफ्ते के अंदर प्रोपर्टी को खाली कर दें वर्ना कोर्ट के एक्शन के लिए तैयार रहें।

बलदेव की मौत के बाद उनकी पत्नी ललिता किराएदार बन गई-
प्राप्त विवरण के अनुसार 1940 में हेम राम शर्मा नाम के एक शख्स ने देहरादून में प्रोपर्टी किराए पर ली थी। हेम राम शर्मा की मौत के बाद उनके बेटे बलदेव वहां रहने लगे। फिर बलदेव की मौत के बाद उनकी पत्नी ललिता किराएदार बन गई। ललिता की 2013 में मौत हो गई। उनकी कोई संतान नहीं थी। इसके अलावा उन्होंने कोई वसीयत भी नहीं छोड़ी। ललिता की मौत के बाद उनके भाई दुर्गा प्रसाद ने किराएदारी का अधिकारी का दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि वह ललिता के परिवार का हिस्सा हैं और वह अपनी बहन के साथ मिलकर मेडिकल का बिजनेस भी कर रहे थे।

कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि ललिता के भाई ना तो परिवार का हिस्सा हैं और ना ही वारिस इसपर कोर्ट ने UP Urban Buildings (Regulation of Letting, Rent and Eviction) Act, 1972 को भी ध्यान में रखा। लेकिन उसको देखने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि ललिता के भाई ना तो परिवार का हिस्सा हैं और ना ही वारिस। इसलिए उसे चार हफ़्तों के भीतर ही मकान को तत्काल प्रभाव से खाली करना होगा अन्यथा उक्त मामले में कोर्ट कार्यवाही करने के लिए विवश हो जायेगी |
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