मैं एक पाकिस्तानी हूँ, पर किसी भारतीय से नफरत नहीं करता

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hasan raja

मेरे नाम हसन रज़ा है, मै एक पाकिस्तानी हूँ और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहता हूँ, मेरे दादा जी नई दिल्ली में रहते थे मै भारतीयों से नफ़रत के साथ बड़ा हुआ और हमेशा यही सोचा कि सभी भारतीय दरिन्दे हैं और पाकिस्तानियों के बारे में कभी अच्छा नहीं सोंच सकते, यकीन मानिये मुझे मेरे परिवार ने कभी यह नहीं सिखाया कि भारतीयों से नफरत करो, यह तो मेरे चारों ओर का परिवेश था जिसका निर्माण राष्ट्रवादी मीडिया और राजनीतिज्ञ भारत विरोधी भावनाओं को वोट में बदलने के लिए करते हैं | यह तो सोशल मीडिया और इन्टरनेट के माध्यम मै सरहद पार के लोगों से बात कर पाया और सोचिये फिर क्या हुआ होगा ?

यद्यपि एक तरफ मैंने पाया की सरहद पार भी कुछ लोग ऐसे हैं जो दुश्मन राष्ट्र के लोगों से ऐसे ही नफ़रत करते हैं पर दूसरी तरफ मै यह देखकर आश्चर्यचकित था कि कैसे भारतीयों की उस घिसीपिटी छवि का पर्दा मेरी आँखों से हट गया और ठीक ऐसे ही भारतीयों ने भी क़ुबूल किया कि मुझसे और मेरे जैसे अन्य पाकिस्तानियों से बात करने बाद एक-दुसरे के प्रति हमारे विचारों में बड़ा परिवर्तन आया है |

हसन रज़ा जो भारतीयों से नफ़रत करते हुए बड़ा हुआ था आज दोनों मुल्कों के बीच शांति के सबसे बड़े वकीलों में से एक है, मै एक पत्रकार और एक लेखक हूँ और अपनी लेखनी के माध्यम से दोनों मुल्कों के लोगों के बीच की खाई को कम करने की कोशिश करता हूँ |

2013 में साउथ एशियन शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का सदस्य होने के नाते मुझे भारत जाने का सौभाग्य मिला था, पहले से चली आ रही घिसी-पिटी सोंच से हटकर कुछ भारतीय मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और वे मुझे उतने ही अज़ीज़ हैं जितने की मेरे पाकिस्तानी दोस्त क्योंकि हम एक–दुसरे किसी राष्ट्रीयता से जोड़ने से पहले इंसानियत से जोड़कर देखते हैं, गन्दी राजनीति और दोनों मुल्कों के बीच तनाव पूर्ण रिश्तों ने हमारी दोस्ती पर कोई प्रभाव नहीं डाला है, बहुत लम्बे समय से मै भारतीयों से बात कर रहा हूँ और इस दौरान मैंने यह महसूस किया है कि सीमा के दोनों तरफ बहुत से ऐसे लोग हैं जो शांति चाहते हैं पर सत्ता में बैठे लोगों की हरकतें दीवार का काम करती हैं |

इसका कोई मतलब नाही चाहे मै जितना ही लम्बा क्यों न लिखूं मै सरहद के पार मुझे मिले प्यार और सम्मान के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगा, जिस क्षण लोगों को यह पता चलता था की मै पाकिस्तान से हूँ और मेरे दादा जी दिल्ली से थे वो मुस्कुराते हुए कहते थे “बहुत ख़ुशी हुई आप हमारे यहाँ आये, आप हमारे मेहमान हैं” मैंने भारत में एक अविस्मर्णीय वक़्त गुजरा है और मै अपने भारतीय दोस्तों को पाकिस्तान में भी वैसा ही प्यार और सम्मान देना चाहूँगा जब भी वे यहाँ आयें |

भारत और पाकिस्तान के लोगों को मेरा एक ही सन्देश है :- आप एक-दुसरे से तबतक नफरत करते रहेंगे जबतक आप एक-दुसरे से बात नहीं करेंगे, जिस क्षण आप बात करना शुरू करेंगे आपको एहसास होगा कि कैसे मीडिया और राजनीतिज्ञ मिलकर आप सभी को गुमराह कर रहे हैं |

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Via – Humans of India

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