मै कभी प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता था, राजीव गांधी मेरी चुगलियाँ सुनने लगे थे और मैंने अपना धैर्य खो दिया था – प्रणब मुखर्जी

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दिल्ली- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को जारी अपने संस्मरण ‘द टर्बुलेंट ईयर्स:1980-1996’ में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव गांधी से जुड़ी कई बातों को सामने रखा है। उन्होंने अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर का ताला खुलवाना राजीव गांधी का गलत निर्णय बताया है तथा लिखा है कि बाबरी मस्जिद गिराया जाना पूर्ण विश्वासघात था, जिसने भारत की छवि नष्ट कर दी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्मरण में कहा है कि बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक पूर्ण विश्वासघाती कृत्य था, एक धार्मिक ढांचे का विध्वंस निरर्थक था और यह पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए था। इससे भारत और विदेशों में मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को गहरा आघात लगा। इसने एक सहिष्णु और बहुलतावादी देश के तौर पर भारत की छवि को नष्ट किया।

प्रधानमंत्री राजीव गांधी की केबिनट से बाहर होने के मामले में प्रणब मुखर्जी लिखते है कि “जब मुझे कैबिनेट से बाहर किए जाने की बात पता चली, तो मैं स्तब्ध और अचंभित था, मुझे यकीन ही नहीं हो पा रहा था, लेकिन मैंने खुद को किसी तरह सहज किया और अपनी पत्नी के बगल में बैठा I वह टीवी पर शपथ-ग्रहण समारोह देख रही थी I” राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आगे लिखा है कि इस घटना के बाद मैंने खुद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि किसी मंत्री स्तरीय आवास की बजाय उन्हें एक छोटा सा मकान आवंटित कर दिया जाए I

कांग्रेस से बाहर किये जाने पर राष्ट्रपति और देश के महान नेता ने लिखा है कि “राजीव की बढ़ती नाखुशी और उनके इर्द-गिर्द रहने वालों के बैर-भाव को भांप गए थे और समय रहते कदम उठाया I”
राष्ट्रपति ने आगे लिखा है कि, “इस सवाल पर कि उन्होंने मुझे कैबिनेट से क्यों हटाया और पार्टी से क्यों निकाला, मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि उन्होंने गलतियां की और मैंने भी कीं, वह दूसरों की बातों में आ जाते थे और मेरे खिलाफ उनकी चुगलियां सुनते थे, मैंने अपने धर्य पर अपनी हताशा को हावी हो जाने दिया I” आपको ज्ञात होगा कि प्रणब को अप्रैल 1986 में कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था, इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस (आरएससी) नाम की पार्टी बनाई थी. वह 1988 में फिर कांग्रेस में लौट आए थे I

ऑपरेशन ब्लूस्टार पर प्रणब मुखर्जी के संस्मरण –
साल 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों के सफाये के लिए चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में प्रणब ने लिखा है कि, “तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी हालात को बखूबी समझती थीं और उनकी सोच बहुत साफ थी कि अब कोई और विकल्प नहीं रह गया है, उन्हें इस बात का अंदाजा था कि उनकी जान जोखिम में है, इसके बाद भी उन्होंने काफी सोच-समझकर देशहित में आगे बढ़ने का फैसला किया I”

राष्ट्रपति ने लिखा है कि यह कहना बहुत आसान है कि सैन्य कार्रवाई टाली जा सकती थी Iबहरहाल, कोई भी यह बात नहीं जानता कि कोई अन्य विकल्प प्रभावी साबित हुआ होता कि नहीं Iउन्होंने लिखा है, “ऐसे फैसले उस वक्त के हालात के हिसाब से लिए जाते हैं, पंजाब में हालात असामान्य थे, अंधाधुंध कत्लों, आतंकवादी गतिविधियों के लिए धार्मिक स्थलों के गलत इस्तेमाल और भारतीय संघ को तोड़ने की सारी कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी थी, और श्रीमती गांधी ने वही किया था जो ऐसे हालातों में किया जाना चाहिए था I”

राष्ट्रपति प्रणब आगे लिखते है कि, “खुफिया अधिकारियों और थलसेना दोनों ने भरोसा जताया कि वे बगैर किसी खास मुश्किल के स्वर्ण मंदिर में मौजूद आतंकवादियों को मार गिराएंगे, किसी ने नहीं सोचा था कि प्रतिरोध की वजह से अभियान लंबा खिंचेगा I”उन्होंने आगे लिखा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सबक यह है कि बांटने वाली प्रवृतियों का प्रतिरोध किसी भी कीमत पर करना होगा Iपंजाब के संकट ने बाहरी ताकतों को भारत के भीतर पनपी फूट का फायदा उठाने और अराजकता के बीज बोने का मौका दे दिया था I

राष्ट्रपति ने लिखा है, “इसके जख्मों को भरने में लंबा वक्त लगा, आज भी समय-समय पर इक्का-दुक्का वारदातें हो जाती हैं I”

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