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कुछ साल पहले मेरे अंकल ने मेरे लिए एक रिश्ता लेकर आये और मेरे मम्मी – पापा भी उनके लाये रिश्ते के लिए राजी हो गये, शादी के कुछ समय के अन्दर ही मुझे अहसास हो गया की वह एक शराबी, अड़ियल और शराब के नशे में गाली – गलौज करने वाला है |

मैंने उसके साथ रहकर उसकी आदतों को बदलने की पूरी कोशिश की पर जब चीजें बर्दाश्त के बाहर हो गयीं तो मैंने उसे छोड़ने का निश्चय के लिया मुझे पूरा भरोसा था कि मेरे मम्मी – पापा मेरे इस फैसले में मेरा साथ देंगे लेकिन ऐसा नही हुआ बल्कि वो मुझपर वापस उसके साथ जाकर रहने के लिए दबाव बनाने लगे ताकि परिवार की बदनामी न हो, हद तो तब हो गयी जब वो मुझे ही झूठा समझने लगे |

मै समझ चुकी थी कि अगर मै अपने मम्मी – पापा के घर पर रही तो मजबूर होकर मुझे वापस उस घर में जाकर रहना उस इंसान के साथ रहना होगा और मै घर छोडकर बॉम्बे आ गयी यहाँ मैंने एक सैलून में काम किया पर कभी भी खुद को उतना अकेला या मजबूर महसूस नहीं किया जितना मै वहां पर करती थी |

मेरी असफल शादी की वजह से लोग मुझे तिरस्कार की नज़र से देखते हैं, मै कभी समझ ही नही पाती हूँ कि मेरे इस फैसले से मेरा परिवार शर्मिंदा क्यों है ? वो मुझसे क्या चाहते थे  कि मै अपने चेहरे पर झूठी मुस्कान चिपकाकर साड़ी जिन्दगी घुट – घुट कर जीती रहती |

आज मै आत्मसम्मान के साथ जी रही हूँ और अपने फैसले से खुश हूँ, मै  सारे परिवारों से विनती करती हूँ ” प्लीज अपनी बेटी के साथ खड़े हों उसके पीछे खड़े होकर उसे वापस उस दलदल में न धकेलें ” और हर लड़की से यही कहूँगी ” अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ो तब भी जब कोई भी तुम्हारे साथ न हो ”

VIA – Human Of Bombay

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