मैंने चार साल एक राक्षस के साथ एक हिंसात्मक रिश्ते में गुजारे

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मै चार सालों तक एक हिंसात्मक रिश्ते में रही, उसने मुझे प्रताड़नाए दीं और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे कि मै उसकी संपत्ति हूँ, हम एक ही विश्वविद्यालय में पढ़ते थे, मैंने यह सब कभी भी किसी से भी शेयर नहीं किया पर पता नहीं कैसे मेरे दोस्तों को थोडा एहसास हो गया, मैंने सीखा था की दोस्त जिंदगी का सबसे अच्छा हिस्सा होते हैं |

जब मै उसके साथ होती थी दुखी रहती थी पर जब मै वापस हॉस्टल आती थी मै खुश रहती थी, उनके साथ मै अपना सारा दर्द भूल जाती थी, उन दिनों में मेरे दोस्त मेरी ख़ुशी का एकमात्र जरिया थे, आखिर कॉलेज खत्म हो गये और क्योकि मै उसके साथ नहीं रहना चाहती थी मैंने दुसरे कॉलेज में दर्शनशास्त्र से परास्नातक करने के लिए दाखिला लिया तथापि वह अभी भी मुझे पीटता था और मेरे दोस्तों तथा परिवार के विषय में उल्टा – सीधा बोलता था |

मै कभी भी इससे निकलने का फैसला नही कर पाती, लेकिन एक दिन एक अनजान शख्स ने facebook पर मुझे रिक्वेस्ट भेजी क्योंकि मै अनजान लोगों को अपने facebook पर नहीं जोडती इसलिए मैंने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं की, लेकिन 15 दिनों के बाद मैंने कर ली, क्यों ? यह मै आज भी नहीं जानती ! अब मै इस शख्स से बात करने लगी और न जाने क्यों उससे बहुत ज्यादा जुड़ाव हो गया, मैंने उसे वो सब कुछ बताया जिससे मै गुजर रही थी, वह बड़े धैर्य के साथ मेरी बाते सुनता था और मुझे इससे निकलने में मेरी पूरी सहायता की |

हमेशा की तरह मै डरी हुई थी, उसने मुझे सांत्वना दी शक्ति और साहस का एहसास दिलाया जितना भी वो कर सकता था, अब मै उससे लड़ने को तैयार थी और आखिरकार मै उस राक्षस के चंगुल से बाहर आ गयी, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, उसने मुझे मेरे डर से बाहर आने में मदद की, एक डर जिसने मुझसे मेरी जिंदगी के चार साल छीन लिए |

लगभग दो महीनों तक एक – दुसरे से बात करने के बाद वह जर्मनी से मुझे मिलने के लिए यहाँ आया, मै बहुत खुश और मगन थी मै सातवें आसमान पर थी वो मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे और फिर वो दोबारा मिलने का वादा करके जर्मनी वापस चला गया,

हम लगातार एक – दुसरे से बात करते रहे लेकिन 8 महीनों के बाद उसने एक मैसेज भेजा जिसमे लिखा था “मेरी एक गर्लफ्रेंड है, मै तुम्हे अपनी जिंदगी में नहीं चाहता तुम्हारे साथ साड़ी जिंदगी बिताने का मेर कोई इरादा नहीं है |” मै पूरी तरह से स्तब्ध और बिखरी हुई थी | नही जानती थी क्या जवाब दूँ पर मैंने जवाब दिया “कोई बात नहीं, ये तुम्हारी जिंदगी है” और सब कुछ वहीं पर खत्म हो गया |

हर महीने मै उसके दोबारा वापस आकर मुझसे मिलने का इंतज़ार करती रही लेकिन सब खत्म हो गया था कैसे भी करके मै उसके लिए कोई बुरी भावना नहीं रखूंगी क्योंकि उसने मेरे बुरे दिनों में किसी देवदूत की तरह मेरी मदद की थी वह आगे बढ़ चुका है और मै भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हूँ लेकिन मै विफल हूँ, मै आज उसके वापस आने की उम्मीद करती हूँ जैसा की उसने एअरपोर्ट से जाते वक़्त कहा था “यह अंत नहीं है, यह सिर्फ शुरुवात है” उसके ये शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं |

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