मै रोता रहा, और पंडित नेहरु अपने बाल संवारते रहे |

0
43263

humans of Bombay

राजनीतिज्ञों के प्रति मेरी नफरत की शुरुवात 1949 में शुरू हुई जब पंडित नेहरु भारत के प्रधानमंत्री थे और मै एक समाचार पत्र के कार्यालय में काम करता था, जब हम अपना कार्यालय दूसरी इमारत में ले गए पंडित नेहरु हमारे मुख्य अतिथि थे, और मेर काम इमारत में उन्हें अनुरक्षण देना था | उन दिनों इतने सुरक्षा इंतजाम नहीं होते थे इसलिए वार्तालाप आसान था | जब उन्होंने मुझे लिफ्ट में देखा तो बोले “ए छोकरा नौकरी क्यों करता है ?” जाकर पढाई करो ! मेरी आँखों में आंसू भर आये और मने उन्हें बताया “मेरे पिता का देहांत हो गया है और बड़ा बेटा होने की वजह से माँ और छोटे भाई की देखरेख के लिए मुझे नौकरी करनी पड़ती है, पर मै अपनी बात खत्म कर पाता इससे पहले ही वह घूम गये और लिफ्ट में लगे शीशे में अपने बाल सवांरने लगे, मै रोता रहा और वह चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान लेकर फोटो के लिए हाथ हिलाते हुए लिफ्ट से बाहर निकल गए |
मै कभी नहीं भूल सकता उस दिन मै कितना असहाय महसूस कर रहा था, और ऐसा ही ना जाने कितने ही भारतीय रोज़ महसूस करते हैं, अपनी परिस्थितियों और भारत के क़ानून से हारे हुए ऐसा कानून जो भारत के आम लोगों का साथ नहीं देता | लीक से हटकर अपने भारतीय भाइयों और बहनों की मदद करें, क्योंकि हमारी एकजुटता ही हमारे लिए आशा की एक किरण है |
Source – Humans Of Bombay
हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here