धूल खा रही हैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की मूर्तियाँ

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प्रतीकात्मक

आरा/भोजपुर(ब्यूरो)- मूर्ति की बात करते है, ये है हमारे देश के वीर क्रांतिकारी जिन्होंने आजादी की लड़ाई में “तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूँगा” जैसे नारे देकर युवाओं के खून में उबाल ला दिया था वही वीर सपूत सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा सफाई के लिए भी मोहताज है| हर साल इनके जयंती के रूप में राजकीय समारोह का तो आयोजन किया जाता है लेकिन समाप्ति के तुरंत बाद इस वीर पुरुष की प्रतिमा पर महादलितों द्वारा अपने गंदे कपड़े सुखाए जाने लगते है| हद तो तब हो जाती है जब उनके चाहरदीवारी के चारो ऒर मैले ढोने वाले डब्बे तक लटका दिए जाते है|

भारत की स्वन्त्रता की लड़ाई में अहम योगदान देने देने वाले बाबू अम्बिका शरण सिंह जिन्होंने आजादी की लड़ाई के साथ ही केंद्रीय मंत्री के रूप में भी अहम योगदान दिया लेकिन इनके प्रतिमा स्थल पर आज तक इनकी मूर्ति तक स्थापित नही हो पाई| इनकी प्रतिमा स्थल का उपयोग जिले में प्रचार प्रसार के लिए किया जाता है| यही नही इनके पुत्र राघवेन्द्र प्रताप सिंह बिहार सरकार में मंत्री रहे और 5 बार विधायक के रूप में जीते, लेकिन अपने पिता की प्रतिमा भी स्थापित नही करा पाये| जिले में 5 साल बाद भी बाबू जगजीवन राम के प्रतिमा का अनावरण नही हुआ, अशोक स्तंभ को अम्बेडकर के पैरों तले बना कर अवहेलना जबकि सुभाष चंद्र बोष की प्रतिमा पर ही महादलितों के गंदे कपड़े सुखाए जाते है उसे देख सरकार की उदासीनता के खिलाफ रोष भी भर जाता है|

ऐसा नही है कि ये काम सिर्फ सरकार का है| यह काम हमारे समाज के लोगो का भी है| हम भारतवासियों का है| देश के लिए जिन सपूतों ने बहुत कुछ किया लेकिन भाग-दौड़ की इस स्थिति में हम उनके लिए कुछ नहीं कर पाए लेकिन जिन लोगों ने कुछ किया उन्होंने इतना ज्यादा प्यार दिखा दिया की राष्ट्रीय प्रतीक ही इनके कदमो में आ गए|

रिपोर्ट- रामा शंकर प्रसाद 

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