गर्भावस्था के दौरान खून की कमी आदि के कारण मृत्यु होने की दशा में प्रभारी अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होगे चन्द्र पाल सिंह

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मैनपुरी (ब्यूरो)- धनराशि उपलब्ध होने के बाद भी जननी सुरक्षा येाजना में जननी ,आशा को भुगतान न करने पर संबंधित लिपिक  का उत्तरदायित्व निर्धारित कर निलम्बन की कार्यवाही की जाये, गर्भावस्था के दौरान खून की कमी आदि के कारण मृत्यु होने की दशा में प्रभारी अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होगें। प्रसव के पश्चात प्रसूता को 48 घण्टे रोका जाये उसे निःशुल्क भेाजन उपलब्ध कराया जाये यदि प्रसूता को निर्धारित अविध से पूर्व रिस्चार्ज  किया गया तो एमओआई को जिम्मेदार मानकर कार्यवाही होगी। ग्रामों में साफ सफाई हेतु उपलब्ध अनटाइल्ड की धनराशि व्यय न करने वाले प्रभरियो के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हो,चिकित्सक दायित्वो के  प्रति गभ्भीर रहें और लोगो की सेवा करने की भावना पैदा करें। उक्त निर्देश जिलाधिकारी चन्द्र पाल सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक की समीक्षा के दौरान दिये।

उन्होने जिला महिला चिकित्सालय,महिला चिकित्सक कुरावली में सीजेरियम मानक के अनुसार न पाये जाने पर गायनोकालाजिस्ट को चेतावनी जारी करने, जननी सुरक्षा योजना में लक्ष्य के अनुसार प्रगति न होने पर प्रभारी चिकित्साध्किारी कुचैला,कहरल,मानपुरहरी को भी चेतावनी जारी करने के निर्देश दिये । उन्होने जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसूताओं को सीएचसी,पीएचसी  पर 48 घण्टे रोकने उन्हें निःशुल्क भोजन एवं ड्ापबैक की समुचित व्यवस्था कराने के लिये सभी चिकित्सा अधीक्षकों ,प्रभारी चिकित्साधिकारियो को निर्देशित किया। राष्ट्ीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की खराब प्रगति पर भी नाराजगी व्यक्त की।   श्री सिंह ने कहा कि गर्भवती महिला का पंजीकरण होते ही उसका खाता नम्बर एएनएम ,आशा अपने पास रखे ताकि प्रसव के तत्काल बाद उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया जा सके। परिवार नियोजन में महिला, पुरूष नसबन्दी की प्रगति काफी खराब है इसे सुधारा जाये। प्र. चिकित्साधिकारी सुनिश्चित करे कि शासन द्वारा जन सामान्य को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं आसानी से मिले सभी लक्षित बच्चो का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो, उन्हें समय से सभी टीके लगाये जाये। एएनएम आशा क्षेत्र में सक्रिय रहकर लोगो को स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करें। उन्होनेे राष्ट्ीय कुष्ठ उन्मूलन ,अन्धता निवारण,बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम  आदि की बिन्दुवार गहन समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने डेंगू से बचाव,रोकथाम एवं नियंत्रण  के बारे में भी बैठक में चर्चा की। उन्होने प्रभारी चिकित्साधिकारियो से कहा कि वह सजग रहकर कार्य करें,डेगूं को जानने एवं बचने के लिए लोगो को जागरूक किया जाये। उन्होने बताया कि अचानक तेज बुखार आना,आखों के पीछे दर्द होना,तेज सिरदर्द, मांसपेसियों एवं जोड़ो में दर्द, जीमिचलाना, उल्टी हेाना,भूख न लगना,मुंह का स्वाद खराब होना,पेट दर्द होना डेगूं के लक्षण है, डेगूं रोगी जांच,दवाइया एवं इलाज सरकारी चिकित्सालयों में मुफत किया जाता है । उन्होने कहा  कि यदि गांव,नगर में एक ही स्थान पर 5 या इससे अधिक ज्वर के रोगी पायें जाये ंतो इसकी सूचना तत्काल जिला अस्पताल,कन्ट्ोल रूम,संबंधित स्वास्थ्य केन्द्र, मुख्य चिकित्साधिकारी,जिला मलेरिया अधिकारी को दी जाये, रोगियो को 108 एम्बुलेन्स से सरकारी अस्पताल लाकर मुख्य इलाज होगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 रामकिशन सहित प्रभारी चिकित्साधिकारी आदि उपस्थिति रहे।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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