जब भारत को कमजोर समझने की गलती कर बैठा पाकिस्तान, लाहौर जाते-जाते बचा था

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प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री 1965 के युद्ध के दौरान सेना के जवानों और अफसरों के साथ दौरा करते हुए

 “पाकिस्तान अगर जम्मू-कश्मीर पर हमला करेगा तो हिंदुस्तान जवाब जरूर देगा और ऐसा जवाब जिसकी जगह और वक्त हम तय करेंगे I”

भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (वर्ष 1965)

1965 के युद्ध को समाप्त हुए 50 वर्ष पूरे हो चुके है और भारत की पाकिस्तान के ऊपर दूसरी शानदार विजय के भी इसी के साथ ही 50 वर्ष पूरे हो चुके है, लेकिन एक बात जो लगभग हर एक युवा के भीतर आ ही जाती है कि आखिर पाकिस्तान जब 1947-1948 में भारत से बुरी तरह से हार चुका था तो उसने भारत के ऊपर एक बार फिर से आक्रमण क्यों किया I पाकिस्तान के भारत के ऊपर आक्रमण करने के आखिर क्या कारण थे आइये जानते है इस बारे में !

वर्ष 1965 में पाकिस्तान ने भारत के ऊपर एक बार फिर से आक्रमण कर दिया था उसका प्रमुख कारण था कि पाकिस्तान भारत को उस समय राजनैतिक तौर पर और सैन्य शक्ति के तौर पर कमजोर समझने की गलती कर बैठा था I

पंडित जवाहर लाल नेहरु के प्रधानमन्त्री रहते हुए उनके द्वारा अपने सबसे अधिक नजदीक समझे जाने वाले देश चीन के हाथों भारत की पराजय होने और उसके बाद वर्ष 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की म्रत्यु हो जाने पर देश की शासन सत्ता की बागडोर देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के हाथों में आ गयी थी और उसी समय दुर्भाग्य से भारत में अकाल पड़ जाने की वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी थी और वही देश ने वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली नेता को भी खो दिया था I

जवाहरलाल नेहरु के सामने लालबहादुर शास्त्री का कद काफी बौना समझा जाता था और यही आंकलन पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने भी किया था I पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान और उनके तत्कालीन विदेश मंत्री और बाद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने जुल्फिकार अली भुट्टो ने यह सोचा कि 1962 में भारत चीन के हाथों पराजय का सामना कर चुका है साथ ही भारत के सबसे प्रभावशाली नेता जवाहरलाल भी अब नहीं रहे और उसके सामने पाकिस्तान ने अमेरिका, रूस और चीन से अत्याधुनिक हथियार तथा अमेरिका से सैबर जेट विमान तथा अमेरिका के नेट टैंक हासिल कर लिए थे जिन्हें युद्ध के मैदान में अपराजय समझा जाता था I

भारत के प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ वार्ता करते हुए
भारत के प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ वार्ता करते हुए

यही सब गणित लगाकर पाकिस्तान ने भारत के ऊपर आक्रमण कर दिया लेकिन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री को जैसे ही यह पता चला कि पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया है उन्होंने अपने शंदेश में कहा था कि पाकिस्तान के हथियारों का जवाब अब हथियारों से ही दिया जाएगा I

देश के शासन की सत्ता अपने हाथों में लेने के पश्चात् प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने सबसे पहले पडोसी देशों के साथ अपने संबंधो को सुधारने के प्रयास में लग चुके थे और इसी क्रम में उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा भी की थी और करांची में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान से मुलाक़ात भी की थी और कश्मीर मुद्दे को बातों के जरिये सुलझाने की बात पर जोर भी दिया था I

लेकिन लालबहादुर शास्त्री की सभी कोशिशें उस वक्त बेकार हो गयी जब अचानक से मई 1965 के आस-पास भारत के पश्चिमी छोर यानि की गुजरात के रन ऑफ़ कक्ष पर पाकिस्तानी सेना के नापाक कदम पड़ गए I पाकिस्तान भारत के ऊपर हमला करके भारत का ज्यादा से ज्यदा भूमि का हिस्सा अपने कब्जे में लेना चाहता था जिसके बदले बाद में पाकिस्तान भारत से उसके बदले कश्मीर का सौदा कर सकें I लेकिन भारतीय जवानों की बहादुरी और प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री की जुगलबंदी ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नस्तेनाबूद कर दिया और उसकी बुरी तरह से हार हुई I

शास्त्री जी अपने कार्यालय में
शास्त्री जी अपने कार्यालय में

भारतीय सेना ने अपने पुराने द्वतीय विश्वयुद्ध में लडे गए हथियारों के साथ पाकिस्तान के सैबर जेटों और उस समय अजेय समझे जाने वाले अमेरिकी पैटन टैंको  का मुकाबला किया और न केवल अपनी जमीन की रक्षा ही की बल्कि साथ ही साथ पाकिस्तान में घुसकर लाहौर के नजदीक तक का काफी ज्यादा हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया I जिस समय पाकिस्तानी सेना ने अखनूर के रस्ते से भारत में घुसने का प्रयास किया ठीक उसी समय तत्कालीन जनरल जे.एन.चौधरी तुरंत ही रात के तक़रीबन बारह बजे के आस-पास प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री के घर पहुंचे और उन्होंने उन्हें सूचना दी कि “सर पाकिस्तानी सेना ने अखनूर के रस्ते से हमला बोल दिया है I उनका मकसद अमृतसर पर कब्ज़ा करना और जम्मू कश्मीर राज्य मार्ग को हमसे अलग कर देना है जिससे हमारी सप्लाई लाइन कट जाए I”

इतना सुनते ही देश के उस बौने कद के प्रधानमंत्री ने तुरंत कहा कि “क्या हम अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं लांघ सकते है I क्या हम राजस्थान या फिर गुजरात से पश्चिमी छोर से पाकिस्तान को नहीं घेर सकते है I”

सेना प्रमुख जे.एन. चौधरी ने कहा क्यों नहीं सर लेकिन इसका मतलब आप जानते है ? प्रधानमंत्री श्री शास्त्री ने कहा मै इसका मतलब अच्छी तरह से समझता हूँ अब पाकिस्तान की इस हिमाकत का जवाब उसी की भाषा में देना अनिवार्य हो चुका है I उन्होंने आगे कहा कि “आप सेना को दूसरा फ्रंट खोलने का आदेश दीजिये, बाकी मैं देख लूँगा I”

इतना सुनते ही सेनाध्यक्ष जनरल चौधरी खुश हो गए और उन्होंने तुरंत ही सेना को पश्चिमी फ्रंट से आगे बढ़ने का हुक्म दे दिया I जिसके परिणाम स्वरुप पाकिस्तान के लाहौर तक भारतीय सेना बहुत आसानी से पहुँच गयी I साथ ही भारतीय हवाई जहाजों ने पाकिस्तान के कई रेलवे स्टेशनों के ऊपर भीषण बम बारी की और सब कुछ तहस नहस कर दिया I पाकिस्तानी सेना को सप्लाई करने वाली रेलों को बम से उड़ा दिया और अंततः अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव न बनता युद्ध विराम को तो शायद उस दिन पाकिस्तान का दुनिया के नक्से से मिटना लगभग तय ही था I
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