अगर नहीं चाहते हैं अपना उत्थान तो ले आइये “कोहिनूर”

0
3612

kohinoor step by step

“कोहिनूर” बस नाम ही काफी हैं आज से लेकर पिछले अनेकों वर्षों में जिस एक किसी चीज ने अपनी कीमत को नहीं खोया हैं, जिसकी चमक कभी भी मध्यम नहीं हुई और न ही जिसके चाहने वालों में कभी कोई कमी आयी हैं अगर वह कोई एक चीज हैं तो बस वह हैं “कोहिनूर”, “कोहिनूर” और बस “कोहिनूर” I

कोहिनूर हीरे ने बड़े-बड़े तख्तोताज देखे लेकिन जिसके पास भी यह गया है कोई इसे संभाल न सका या फिर यूँ कहे तो मिट गए इसे सँभालने वाले I इस हीरे ने हिंदुस्तान से लेकर अरब तक और अरब से लेकर ब्रिटेन तक दुनिया के बड़े –बड़े से रजवाड़े को अपने सामने झुकाया और ऐसा झुकाया कि बस वह झुक कर ही रह गये I फिर कभी उठ ही न सके I

दुनिया का यह बेशकीमती हीरा कभी भारत की विश्व की सबसे प्राचीन हीरे की खान गोलकुंडा की खान से निकला था I लेकिन जैसे ही धरती से बाहर इसने चलना प्रारंभ किया फिर रुका ही नहीं हा यह बात अलग हैं कि कुछ दिनों के लिए इसने आराम जरूर किया I गोलकुंडा की खान से निकलने के बाद यह विश्व प्रसिद्द हीरा दक्षिण भारतीय काकातिय वंसज के राजाओं के पास पहुंचा और वहां से 1323 ई. में खिलजी वंश के पास I

alauddin khilji
अलाउद्दीन खिलजी

जब कोहिनूर हीरा खिलजी वंश के पास पहुंचा उस समय खिलजी वंश की पूरे भारत में बड़ी साख थी I चारो तरफ खिलजी वंश का ही दबदबा था और देश का सबसे बड़ा साम्राज्य भी इन्ही का था I लेकिन हीरे के पास आते ही इस वंश का विनाश शुरू हो गया I और अंत में यह हीरा मुगलों के हाथ यही से लगा I अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हीरा मुगलों के शासक बाबर के हाथों में पड़ा 1526 ई. में I

 

मशहूर मुग़ल बादशाह बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में इस हीरे के बारे में उल्लेख किया हैं और उसने लिखा हैं कि यह हीरा कुछ समय के लिए ग्वालियर के तोमर राजाओं के पास था I और अंतिम तोमर राजा को जब सिकंदर लोधी ने हराया था और उसे दिल्ली में अपने ही किले में बंदी बना कर रखा था तब उसी जीत में उसे यह हीरा भी बरामद हुआ था I

Sultan-Ibrahim-Lodhiऔर तब देखिये इस हीरे का कमाल अंतिम तोमर शासक को बंदी बनाया सिकंदर लोधी ने उस की संपत्ति पर कर लिया अधिकार जिसमें से कोहिनूर हीरा भी एक था I उसके कुछ दिनों के बाद ही मुगलों ने सिकंदर लोधी पर कर दिया आक्रमण और सिकदंर को पराजित कर मुगलों ने विक्रमादित्य को आज़ाद करवा दिया साथ सारी संपत्ति भी हुमायूँ ने उसे वापस कर दी I इस पर प्रशन्न हो विक्रमादित्य ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को कोहिनूर हीरा भेंट स्वरुप दे दिया I

 

कोहिनूर हीरा का भेंट स्वरुप हुमायूँ को मिलना और हुमायूँ का पतन –

Emperor_Humayun
मुग़ल बादशाह हुमायूँ

विक्रमादित्य को जैसे सिकंदर लोधी से हुमायूँ ने आजाद करवाया, विक्रम ने प्रशन्न मन से हुमायूँ भेंट में दुनिया का सबसे बेशकीमती हीरा कोहिनूर भेंट कर दिया I हीरा मिलते ही कभी न हारने वाले मुगलों को शेरशाह सूरी की सेना ने बुरी तरह से पराजित कर दिया और यहाँ तक मुगलों की छति हुई कि हुमायूँ को अपने प्राण बचाने के लिए कंधार और अफगानिस्तान की तरफ रुख करना पड़ा I वह भारत छोड़ अफगानिस्तान पहुँच गया I10 सालों तक हुमायूँ जैसे बादशाह को भी दर-दर की ठोकरें खाने की जद्दोजहद करनी पड़ी हालाँकि बाद में ईरान साम्राज्य की मदद से हुमायूँ वापस भारत आ पाया लेकिन कोई बहुत अच्छा शासन स्थापित न कर सका I

अकबर ने कभी भी कोहिनूर को अपने पास नहीं रखा –

भारत में मुग़ल वंश के सबसे बड़े शासक के रूप में केवल एक ही शासक का नाम लिया जाता हैं वह अकबर हैं I जिसे बादशाह की उपाधि से भी नवाजा गया लेकिन अकबर ने कभी भी इस विश्वप्रसिद्द हीरे को अपने पास नहीं रखा I कोहिनूर हुमायूँ के बाद मुगलों में सीधे तौर पर फिर से शाहजहाँ से जुड़ा I

मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और कोहिनूर –

shahjahan
मुग़ल बादशाह शाहजहाँ

हुमायूँ के बाद अकबर ने इस विश्वप्रसिद्द हीरे को कभी भी तवज्जों शायद इसी कारण से नहीं दी थी क्योंकि उसे लगता था कि यह श्रापित हैं और यह जिसके पास भी रहा हैं उसका पतन ही हुआ हैं I बाद में इस हीरे ने मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के खजाने की शोभा बना I शाहजहाँ ने इस प्रशिद्ध हीरे को अपने विश्वप्रसिद्द मयूर सिंघासन (तख्ते ताज) में जड्वाया था I

लेकिन इसका उपभोग न कर सका था शाहजहाँ – मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने इसे अपने मयूर सिंघासन में जड़वा तो लिया लेकिन उसके बाद ही उसके पुत्र क्रूर औरंगजेब ने उससे सिंघासन ही छीन लिया और अपने पिता शाहजहाँ को आगरे के किले में कैद कर दिया जहाँ पर उसकी कैद में मृत्यु हो गयी I

NaderShah
नादिर शाह

शाहजहाँ के बाद कोहिनूर और मयूर सिंघासन दोनों को ही 1739 ई. में फारस के शासक नादिर शाह ने मुगलों पर आक्रमण कर उसे अपने साथ फारस ले गया और इसी के साथ भारत में मुग़ल साम्राज्य का भी अंत हो गया I और यहीं पर इस हीरे का नाम भी कोहिनूर रखा गया I

लेकिन कोहिनूर को नादिर शाह भी न संभाल सका और 1747 में इस विश्वप्रसिद्द हीरे के आते ही नादिर शाह की भी हत्या कर दी गयी और यह हीरा अब पहुँच गया था अफ़गानिस्तान के शांहशाह अहमद शाह दुर्रानी के पास। और उनकी मौत के बाद उनके वंशज शाह शुजा दुर्रानी के पास पहुंचा। पर कुछ समय बाद मो. शाह ने शाह शुजा को अपदस्त कर दिया।

maharaja ranjiit singh
महाराजा रणजीत सिंह

लेकिन साल 1830 में अफ़ग़ानिस्तान का तत्कालीन पदच्युत शासक शूजाशाह किसी तरह कोहिनूर के साथ बच निकला और पंजाब पहुंचा। उसने यह हीरा महाराजा रणजीत सिंह को भेंट किया। इसके बदले में महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी सेना अफ़ग़ानिस्तान भेज कर शाह शूजा को वापस गद्दी दिलाने के लिए मदद की।

महाराजा रणजीत सिंह के जीवित रहते उनकी यह इच्छा थी कि इस विश्वप्रसिद्द हीरे को उड़ीसा के विश्वप्रसिद्द भगवान जगन्नाथ के मंदिर में पहुंचा दिया जाय लेकिन यह संभव न हो सका और महाराजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने लाहौर संधि के तहत यह विश्वप्रसिद्द हीरा सिक्खों से ले लिया I

उस समय के अंग्रेजों के गवर्नर ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ को प्रसन्न करने के लिए यह प्रसिद्ध हीरा उनको भेंट कर दिया I और इस हीरे को महारानी के मुकुट में 1852 ई. में सजा दिया गया I

अंग्रेजो को कोहिनूर मिलना और उनके पतन की शुरुआत होना –

1845 के युद्ध में अंग्रेजों ने इस हीरे को महाराजा रणजीत सिंह के पुत्र से लिया जिसे बाद में महाराजा के पुत्र दिलीप सिंह ने महारानी विक्टोरिया को भेंट स्वरुप दे दिया था यह घटना तक़रीबन 1849 के आस-पास की थी I जब ब्रिटेन के राजघराने के पास यह पहुंचा था उस समय ब्रिटेन का आधिपत्य आधे से ज्यादा दुनिया पर था लेकिन इस हीरे का कमाल देखिये इस हीरे ने पहुँचते ही एक के बाद एक करके सभी देशों को आज़ाद करवा दिया ब्रिटेन के चंगुल से I

queen-victoria
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया

ब्रिटेन के पास हीरा पहुँचने के बाद ही 1857 में भारत का पहला शसस्त्र विद्रोह झांसी की महारानी लक्ष्मी बाई के नेत्रत्त्व में हुआ हालाँकि उसमे महारानी पराजित हुई लेकिन आजादी की इच्छा उन्होंने प्रबल कर दी साथ ही पूरे हिंदुस्तान में लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ सर उठाना प्रारंभ कर दिया था I

और आज वक्त देखिये कि जिन अग्रेजों के राज्य में कभी सूरज अस्त नहीं होता था आज उन्ही अंग्रेजों के वायसराय और गवर्नर जनरलों के कपड़े भारत के बैंडबाजे वाले पहनते हैं I घोड़ी चलाने वाले पहनते हैं I हमारे देश में होनी वाली नौटंकियों में नाचने वाले पहनते हैं I

 

व्यंग -: तो भईया जी हमारा तो कहना यही हैं कि इसे अब वापस न लाओ और अगर ब्रिटेन की महरानी का मन भर गया हो तो इसे ISIS या फिर अलकायदा, बोको हराम में से किसी और को दिलवा दो अपने आप ही निपट जायेंगे I मारने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी I

निवेदन – अगर ब्रिटेन से भारत को विश्वप्रसिद्द हीरा मिलता हैं तो उस हीरे पर पहला और आखिरी अधिकार केवल और केवल उडीसा के भगवान् जगन्नाथ जी का हैं I महाराजा रणजीत सिंह ने अपने अंतिम समय में लिखी वसीयत में भी इस बात का उल्लेख किया था I और वास्तव में इसके सही अधिकारी भी यही हैं I क्योंकि इतिहास यह कहता हैं कि कोहिनूर को कोई रोक न सका I यह ईश्वर की प्रकृति की एक अमूल्य निधि हैं और इसे ईश्वर को ही समर्पित कर देना अधिक उचित होगा I

……….(धर्मेन्द्र सिंह)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here