IIT में रैंक 167 व 410 पर एडमिशन के लिए नहीं हैं 1 लाख

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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के धर्मराज सरोज के दो बेटों ने राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली IIT की प्रवेश परीक्षा में 167वां और 410वां स्थान प्राप्त किया है, पर अब समस्या यह है की रोज मजदूरी करके घर चलने वाले धर्मराज अपने बेटों के दाखिले के लिए रुपए 1,00,000 की व्यवस्था कैसे करें |

धर्मराज सूरत की एक फैक्ट्री में काम करते हैं और बड़ी मुश्किल से अपने सात सदस्यों वाले परिवार का पेट पालते हैं,  18 साल के राजू और 19 साल के ब्रजेश ने जब  पिता जी को उनकी इस सफलता के बारे में बताया तब वह यह समझ ही नही पाए की यह इतनी बड़ी बात क्यों हैं ? राजू ने 167वां और ब्रजेश ने 410वां स्थान प्राप्त किया है जबसे इस बात का महत्त्व धर्मपाल को पता चला है उनकी रातों की नेड इस सोच में उड़ गयी है कि वो बेटों के दाखिले के लिए पैसों की व्यवस्था कैसे करें ?

धर्मराज का परिवार तिरपाल से ढके एक कच्चे झोपड़े में रहता है, जमापूंजी के नाम पर 8 बकरियां, 1 साइकिल और एक टेबल फैन है |

राजू और उसका परिवार
राजू और उसका परिवार

धर्मराज  ” सूरत में दो शिफ्ट काम करने के बाद मै मुश्किल से 12000 प्रतिमाह कम पता हूँ, चीजें बहुत आसान थी जब बच्चों को प्रतापगढ़ नवोदय विद्यालय में दाखिला मिल गया था उन्होंने वही से IIT के तैयारी के लिए स्कालरशिप भी प्राप्त कर लिया था, पर अब क्या ? पैसे खान से आएंगे ? मेरे पास तो एक इंच जमीन भी नही है |

ब्रजेश का सपना इलेक्ट्रॉनिक से IIT के बाद IAS करने का है जबकि राजू IIT के बाद MBA करना चाहते हैं पर ये कैसे होगा कुछ पता नही है|

ब्रजेश ” हमारे गाँव में कई मेधावी छात्र हैं पर वह ये नही समझते की सपनों को पूरा करने के लिए सुविधाएँ नहीं बल्कि संकल्प की ज़रूरत होती है | ”

 

Source – TOI

 

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