योगी सरकार के ऐलान के बावजूद भी सक्रीय अवैध खनन माफिया

कुशीनगर (ब्यूरो) योगी सरकार तथा कोर्ट के कड़े नियमों के बाद भी जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते जनपद में बालू खनन माफिया एक बार फिर सक्रिय हैं । जो अपनी ऊंचे पकड़ की बदौलत तथा कुछ अधिकारियों की शह के चलते इस अवैध कारोबार में लिप्त हैं। एक तरफ सरकार के नियमों की अवहेलना कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पर्यावरण के साथ सीधे खिलवाड़ कर रहे हैं।

कल डीएम और एसपी के संयुक्त अभियान पर हुई कार्यवाही कहीं ना कहीं सिस्टम की लापरवाही है जो कार्यवाही बहुत पहले हो जानी चाहिये थी, ताकि बालू के खनन में लगे अवैध कारोबारियों के अंदर भय पैदा हुआ होता। पिछले कुछ महीनों से जनपद में बालू खनन पर रोक लगी है। वैसे तो बालू का चोरी छिपे खनन छोटी गंडक नदी पर भी होता रहा है। लेकिन सर्वाधिक अवैध खनन बड़ी गंडक नदी (नारायणी) के छितौनी बांध के आस-पास होता रहा है। इसको लेकर छितौनी के लोगों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं आया।इस खनन कारोबार में पुलिस एवं सफेदपोशों की भूमिका भी संदिग्ध है।

सूत्रों की माने तो बालू ढोने के रास्ते में पड़ने वाले थाने और पुलिस चौकी पर प्रति ट्राली बधा हुआ है। तभी तो जनपद के एक छोर से दूसरे छोर तक बालू पहुंच जा रहा है। स्थानीय नागरिक बताते हैं कि शाम के समय सिरपत नगर से सैकड़ों ट्रॉली बालू छितौनी के रास्ते पनियहवा, नेबुआ, खड्डा सहित जनपद के अन्य क्षेत्रों में जाता है। सबसे अहम बात यह है कि अवैध खनन से नदी का रुख बदल जाता है और रिहाइशी इलाके तथा उपजाऊ जमीनों की कटान होने लगती है। बांधो के निकट अवैध खनन होने से बंधा भी प्रभावित हो रहा है। बाँधो की सुरक्षा में लगे बाढ़ खंड के अधिकारियों का सख्त निर्देश है कि किसी भी तरह का खनन बंधे के इर्द-गिर्द 600 मीटर तक नहीं होना चाहिए। बाढ़ खंड के अधिकारी भी अंदेशा जता रहे हैं कि बंधे के पास अवैध खनन से बांध खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में अवैध बालू कारोबारियों की चांदी ही चांदी है।

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