अवैध खनन, अवैध विस्फोट और अवैध भारी मशीनों का उपयोग से थर्राया विंध्य श्रृंखलाएं

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अहरौरा/मिर्जापुर (ब्यूरो)-  अहरौरा बाजार तीन किलोमीटर की परिधि में स्थित है। इसके बाद चारों दिशाओं में विन्ध्य पहाड़ी श्रृंखलाएं हैं। यहां का पत्थर व्यवसाय बड़ा ही सम्वृद्धशाली रहा है। झारखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से मजदूर वर्ग हाथ से पत्थर के सील लोढ़ा, पटिया, चौका और पत्थर के ईट आदि का निर्माण किया करते थे।

महिलाएं भी गिट्टी बनाने का कार्य करती थी। वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और जल प्रदूषण का नामोनिशान न था। लेकिन बसपा सरकार के दौरान अम्बेडकर पार्क के लिए अहरौरा क्षेत्र के पत्थरों की मांग हुई और सरकारी खजाना अहरौरा पर मेहरबान हो गई। खनन मालिक /पट्टा धारक करोड़ पति बन गये और सत्ता में पकड़ बन गई और फिर अवैध खनन, भारी मशीनों का उपयोग और विस्फोटकों का उपयोग होने लगा। फिर मजदूर वर्ग अपने – अपने घरों की ओर लौट गये।

अवैध धंधा में माफिया और बाहुबली लोग बन गये। भारी मशीनों के संदर्भ में बताते चलें कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अन्तर्गत खान सुरक्षा महानिदेशालय के उत्तरी अंचल वाराणसी क्षेत्र द्वारा पत्रांक संख्या /29019/comp.-02/VR (NZ) /2016/मिर्जापुर /2280 दिनांक 20/10/2016 में खान सुरक्षा निदेशक, वाराणसी क्षेत्र, वाराणसी द्वारा सुरेन्द्र सिंह के आर टी आई के जबाब में लिखा गया है कि प्रेट्रौलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन विस्फोटक नियम, 2008 के प्रावधानों के तहत विस्फोटक रखने और उसके उपयोग के लिए लाइसेंस जारी करता है।

जनपद मिर्जापुर में खनन कार्य में उपयोग भारी मशीनों का लाइसेंस सिर्फ सात खान मालिकों /पट्टा धारकों को दिया गया है जिसमें अहरौरा क्षेत्र में पांच है। जिसमें तीन धुरियां भू. सं.428 रकवा 1.60एकड़, भू.सं. 428रकवा 2.0एकड़ और भू. सं. 428 करवा 2.5एकड़ है और भगौतीदेई में दो है। जिसमें भू. सं. 703 करवा 2.0 एकड़ व भू. सं. 180/2 करवा 5.0 एकड़ है।

अभी दो दिन पूर्व ही ग्राम सोनपुर थाना अहरौरा के दक्षिण स्थित पी एन सी क्रेशर कम्पनी द्वारा बड़े – बड़े चट्टानों के रूप में पत्थर निकालने के लिए करीब दो मीटर से उपर डीप होल करके ब्लास्टिग की गई जिससे गांव में भूकंप के झटके महसूस किए गए। अभी कुछ महिने पहले विस्फोट से इसी क्षेत्र में एक जान चली गई थी। गांव के कुंए और हैंडपंपों से गंदा पानी निकलने लगा ग्रामीणों ने विरोध किया और 100 नम्बर पर फोन किया। 100 पुलिस सीमित अधिकार क्षेत्र से समस्या का अनुकूल हल नहीं निकल पाया। इस क्षेत्र के निवासियों के पक्के मकानों में दरारें पड़ चुकी है। एक भी ऐसा पक्का मकान नहीं है इस क्षेत्र में जिसमें विस्फोट के कारण दरारें न पड़ी हो।

जबकि ग्रामीणों का आरोप था कि इस तरह का विस्फोट करने का इन पट्टाधारको /खान मालिकों के पास लाइसेंस नहीं है। भारी मशीनों का उपयोग जिनके पास लाइसेंस है भी तो पोकलैन नामक मशीन उसमें शामिल नहीं है और शेष तो अवैध हैं। जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ब्लास्टिग से उनके उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है। हाथ से काम करने वाले मजदूरों की रोटी रोजी छीन गयी है। कुम्हीया, सिरहा, बरही, धुरियां, सोनपुर, भगौतीदेई, बसाढ़ी, लालपुर, जिगना, बगहिया आदि क्षेत्रों में अवैध खनन कार्य हो रहा है। ऐसे में सूत्रों ने जानकारी दी है कि अवैध खनन से जुड़े हर विभाग में एक कारखास होता है जिसके पास एक डायरी होती है जिसमें इन माफियाओं का कच्चा चिट्ठा होता है।

जिसके आधार पर अवैध विस्फोट की अवैध खनन की अवैध वसूली की जाती है। इस क्षेत्र में नागरिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ खान अधिकारी इस क्षेत्र में दौरा करने के नाम पर लाखों की उगाही करते हैं और अवैध ब्लास्टिग की शिकायत पर अंग्रेजी में लिखा दस्तावेज दिखाते हैं जिसको वे स्वयं नहीं पढ़ते हैं। उसी को वैध लाइसेंस बता देते हैं कि सभी पट्टे और विस्फोट वैध और सरकारी मान्यता प्राप्त है। ऐसे में योगी सरकार क्या इनपर लगाम लगा पायेगी या अधिकारी उन्हें भी चाईनीज दस्तावेज दिखायेगे।⁠⁠⁠⁠

रिपोर्ट- अंशू मिश्रा

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