प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार हनुमानगढ़ी टीले पर बढ़ता जा रहा अवैध कब्जा

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फतेहपुर चौरासी/उन्नाव (ब्यूरो) नगर पंचायत फतेहपुर चौरासी में हनुमानगढ़ी के नाम से जाना जाने वाला टीला घोर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। टीले के आस-पास पड़े सरकारी भूमि पर अवैध रूप से लोगों ने कब्जा जमा रखा है और धीरे-धीरे उक्त टीले की भूमि विलुप्त होती जा रही है ।

बताते चलें कि नगर पंचायत फतेहपुर चौरासी के गांधीनगर मोहल्ला में बूढ़े बाबा बाजार के निकट पूर्व दिशा की ओर एक प्राचीन टीला स्थित है। इस टीले को हनुमानगढ़ी के रूप में जाना जाता है।वर्ष १९८५ में इसकी खुदाई के दौरान इसमें तमाम ऐतिहासिक मूर्तियां मिली थी ।नगर के जानकार लोग बताते हैं कि इस किले की खुदाई पुरातत्व विभाग द्वारा की गई थी तब इसमें लक्ष्मी, गणेश, भगवान शंकर, हनुमान आदि अनेक देवी देवताओं की मूर्तियां मिली थी ।यह मूर्तियां पुरातत्व विभाग के पास आज भी सुरक्षित हैं ।नगर के दिवंगत समाज सेवी छमा कर दुवेदी कमलाकर की अगुवाई में उस समय बूढ़े बाबा सेवा समिति के नाम से एक समिति का पंजीकरण पुरावशेष व बहुमूल्य कलाकृति विभाग लखनऊ द्वारा कराया गया था। इस समिति में नगर सहित आसपास के कई ग्रामों के प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को मिलाकर लगभग 200 लोग शामिल थे। जिन्होंने यह बीड़ा उठाया था कि उक्त टीले को हनुमानगढ़ी के रुप में विकसित किया जाएगा।


वर्ष १९८९ में पंजीकृत कराई गई इस समिति के कुछ महत्वपूर्ण पदाधिकारियों एवं सदस्यों की की धीरे धीरे आकस्मिक मौत हो गई। जिससे यहां खुदाई के बाद कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सका। टीले के आसपास पड़ी खाली भूमि पर पूर्व में सेतु निगम ने अपना कब्जा जमा कर अपना भवन बना दिया था और अब अब तक सेतु निगम के भवनों सहित आसपास की खाली भूमि पर दबंग भूमाफियाओं ने अपने कब्जे जमा रखे हैं ।जिनको बेदखल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है ।टीला भी घोर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है और मूर्तियां ले जाने के बाद पुरातत्व विभाग के भी अधिकारी कर्मचारी यहां झांकने तक नहीं आए हैं। नगर के तमाम सभ्रांत नागरिकों ने पुरातत्व विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि नगर के उक्त इतिहासिक टीले को और उसकी भूमि को अवैध कब्जेदारों से मुक्त करा कर ऐतिहासिक संपत्ति को सुरक्षित किया जाए और वही पर मन्दिर का निर्माण हो।

रिपोर्ट – रघुनाथ प्रसाद

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